हिमाचल ने खो दिया एक बेबाक सिपाही: अलविदा मेजर विजय सिंह मनकोटिया
Awaz Janadesh SuperAdmin (Super Administrator)
Published Sep 29, 2026 at 12:43 PM • 2 views
हिमाचल ने खो दिया एक बेबाक सिपाही: अलविदा मेजर विजय सिंह मनकोटिया
— राजेश रढाईक (प्रधान संपादक, आवाज जनादेश)
राजनीतिक गलियारों की उठक-बैठक, समीकरणों के उतार-चढ़ाव और चुनावी सरगर्मियों के बीच कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो महज राजनेता नहीं, बल्कि एक युग और एक विचारधारा बन जाते हैं। हिमाचल प्रदेश की राजनीति के ऐसे ही एक शिखर पुरुष, पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया अब हमारे बीच नहीं रहे। 87 वर्ष की आयु में उनके पैतृक गांव त्यारा (कांगड़ा) में मंगलवार सुबह हुए अचानक निधन से देवभूमि ने अपना एक मुखर, निर्भीक और जनहितैषी बेटा खो दिया है। यह आघात केवल उनके समर्थकों या परिवार के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण हिमाचल की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
जनहित और हिमाचल की अस्मिता को हमेशा रखा सर्वोपरि
मेजर साहब से जब भी मिलना हुआ, उनका एक ही स्थायी भाव देखने को मिलता था—हिमाचल और हिमाचल की जनता का हित। राजनीतिक पाले और व्यक्तिगत समीकरण चाहे जो रहे हों, लेकिन जब बात देवभूमि के अधिकारों और यहां के आम जनमानस की आती थी, तो मेजर मनकोटिया बिना किसी लाग-लपेट के सबसे आगे खड़े नजर आते थे। उनकी यह चिंता केवल दिखावे की नहीं थी, बल्कि उनकी रग-रग में हिमाचल की माटी के प्रति प्रेम और उसकी तरक्की का जज्बा समाया हुआ था। वह अक्सर राजनीतिक मंचों और बैठकों से यह स्पष्ट संदेश देते थे कि नेताओं के लिए व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर हमेशा हिमाचल के हित होने चाहिए।
फौजी अनुशासन से लेकर सियासत के भूचाल तक का सफर
सेना की वर्दी से निकलकर राजनीति के मैदान में उतरने वाले मेजर मनकोटिया के भीतर एक फौजी का अनुशासन, अडिगता और सच बोलने का साहस आजीवन बरकरार रहा।
* पांच बार विधायक और दो बार मंत्री के रूप में उन्होंने अपने कांगड़ा क्षेत्र और प्रदेश की सेवा पूरी निष्ठा से की।
* कांग्रेस से लेकर भाजपा तक के सफर में उन्होंने अपनी एक अलग और मजबूत लकीर खींची।
* पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के साथ उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और वर्ष 2007 में उनके द्वारा लाई गई चर्चित 'सीडी' ने तो हिमाचल की सियासत में ऐसा भूचाल लाया था,वहीं से उनके और राजा वीरभद्र सिंह के रिश्तों में भी दरार आ गई थी। जिसकी गूंज आज भी राजनीति के पन्नों पर दर्ज है। वह राजनीति में किसी के दबाव में झुकना नहीं जानते थे । जो सही लगा, उसे डंके की चोट पर कहना उनका स्थायी स्वभाव था।
एक युग का अंत, जो हमेशा याद रहेगा
आज जब मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने हिमाचल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है, तो ऐसा महसूस होता है कि राज्य की राजनीति का एक बेहद बेबाक और ऊर्जावान अध्याय समाप्त हो गया है। उनके जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरना आसान नहीं होगा।
'आवाज जनादेश' परिवार की ओर से महान नेता और हिमाचल की शख्सियत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों तथा उनके चाहने वालों को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
अलविदा मेजर साहब! हिमाचल आपकी बेबाकी और प्रदेश के प्रति आपकी अगाध निष्ठा को हमेशा याद रखेगा।
Read & Verify on Smartphone
Scan this official QR Code to view the cryptographic verification stamp or share directly via mobile messaging apps.
Reader Comments & Public Debate
0No reader comments yet.
Be the first to share your thoughts on this story below!
✍️ Join the Discussion