विकसित भारत G Ram G योजना में हिमाचल देश भर में अव्वल, लेकिन संकट में ग्राम रोजगार सेवक
Awaz Janadesh SuperAdmin (Super Administrator)
Published Sep 27, 2026 at 04:39 AM • 12 views
विकसित भारत G Ram G योजना में हिमाचल देश भर में अव्वल, लेकिन संकट में ग्राम रोजगार सेवक
ढाई महीने पहले शुरू हुई नई योजना में तकनीकी बाधाओं और प्रतिकूल मौसम को पछाड़कर जीआरएस ने प्रदेश को दिलाया शीर्ष स्थान।
फरवरी से वेतन अटका, प्रशासनिक खर्चों का गलत बोझ और कार्यदिवस के दबाव से तनाव में कर्मचारी।
तनाव के चलते कई जीआरएस गंभीर बीमारियों की चपेट में, संघ ने दी कड़े कदम उठाने की चेतावनी।
शिमला/हमीरपुर: केंद्र सरकार द्वारा गत 1 जुलाई 2026 को पूरे देश में लागू की गई 'विकसित भारत G Ram G' (VB G Ram G) योजना के क्रियान्वयन में हिमाचल प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में अव्वल स्थान हासिल किया है। ग्रामीण विकास विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि मानसून के मौसम की बाधाओं, 'जीरो' से शुरुआत और पुराने कार्यों के बंद होने जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल के ग्राम रोजगार सेवकों (GRS) ने इस योजना को धरातल पर सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
हालांकि, जिस योजना की सफलता की नींव इन कर्मचारियों ने रखी है, आज वही ग्राम रोजगार सेवक गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजर रहे हैं। 'ग्राम रोजगार सेवक संघ हिमाचल प्रदेश' ने प्रेस को बयान जारी कर सरकार और विभाग के समक्ष अपना गहरा दर्द बयां किया है।
अनगिनत तकनीकी अड़चनों के बीच किया बेहतरीन कार्य
संघ ने बताया कि योजना की शुरुआत के वक्त ही पूरे देश और प्रदेश में मानसून का दौर था, जो कार्य के अनुकूल नहीं था। इसके बावजूद युक्तधारा की समस्या, NMMS ऐप का बार-बार बदलता स्वरूप, ई-केवाईसी (e-KYC) और जियो टैगिंग (Geo Tagging) जैसी तमाम तकनीकी जटिलताओं को पार करते हुए जीआरएस ने पूरी निष्ठा से काम किया। लेकिन इसके एवज में आज उन्हें रोज नए पत्र थमाकर सिर्फ जवाब तलब किया जा रहा है।
वेतन संकट और प्रशासनिक खर्चों का अतिरिक्त बोझ
संघ का आरोप है कि एडमिन मद (जिससे रोजगार सेवकों का वेतन मिलता है) पर कंप्यूटर ऑपरेटर, तकनीकी सहायक, कनिष्ठ लेखापाल, जेई, सहायक अभियंता, लोकपाल व अन्य कई कर्मियों के वेतन का बोझ डाल दिया गया है, जबकि एक्ट के तहत एडमिन फंड पर पहली प्राथमिकता ग्राम रोजगार सेवकों की है। स्थिति यह है कि जीआरएस को फरवरी 2026 से जून 2026 तक का वेतन भी अभी तक नहीं मिल पाया है।
पुरानी देनदारियां और कार्यदिवस (Person Days) का दबाव
कार्यदिवस के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जीआरएस पर अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है, जबकि यह पंचायत से ब्लॉक स्तर तक की एक संयुक्त टीम प्रक्रिया है।
कम कार्यदिवस के कारण: एस्टीमेट्स का 60:40 अनुपात में न बन पाना, लेबर की उपलब्धता कम होना, ऐप की तकनीकी समस्याएं और लेबर-मटेरियल की समय पर अदायगी का न होना मुख्य कारण हैं।
बकाया राशि: मनरेगा की वर्ष 2025-26 की लगभग 100 करोड़ और जून 2026-27 की 22 करोड़ रुपये की देनदारी केंद्र सरकार से लंबित है, जबकि नई योजना (VB-RAM-G) की भी 9 करोड़ की देनदारी हो चुकी है।
अतिरिक्त कार्यभार: चुनावों, बीपीएल (BPL) सर्वे और पीएमएवाई (PMAY) सर्वे में ड्यूटियां देने के बाद भी इन्हें केवल प्रताड़ित किया जा रहा है।
तनाव से गंभीर बीमारियों की चपेट में आए कर्मचारी
लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना के कारण ग्राम रोजगार सेवकों की हालत बिगड़ती जा रही है। तनाव के चलते:
जिला हमीरपुर से एक ग्राम रोजगार सेवक ब्रेन हेमरेज के कारण अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
जिला चंबा से एक महिला कर्मी कैंसर से पीड़ित हो चुकी हैं।
कांगड़ा और बिलासपुर से एक-एक महिला व पुरुष साथी की किडनियां खराब होने के कारण वे भी अस्पताल में भर्ती हैं।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि हालात ऐसे ही रहे और भविष्य में कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
स्थाई नीति की मांग और आंदोलन की चेतावनी
पिछले 18 वर्षों से लगातार अपनी जायज मांगों को उठाते आ रहे ग्राम रोजगार सेवकों ने मांग की है कि लंबित वेतन का शीघ्र प्रावधान किया जाए और उनकी स्थायी नीति बनाई जाए। संघ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि उनकी इन गंभीर समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो समस्त कर्मी आने वाले दिनों में कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
— प्रेस विज्ञप्ति द्वारा: ग्राम रोजगार सेवक संघ, हिमाचल प्रदेश
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