नरम पड़े स्पीकर पठानिया, विपक्ष ने भी छोड़ा गुस्सा

Date:

विधानसभा में पिछले शुक्रवार से बना गतिरोध टूटा

सैलरी और पेंशन रुकने पर विपक्ष गंभीर : जयराम

आवाज जनादेश/न्यूज ब्यूरो शिमला

जिस भी नियम में चर्चा मांगें, सरकार तैयार : सुक्खू

हम तो देशद्रोह के मुकदमे अब भी झेल रहे : मुकेश

विधानसभा के मानसून सत्र में पिछले शुक्रवार से बना प्रतिरोध मंगलवार को टूट गया। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया भी थोड़ा नरम हुए और विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने भी गुस्सा छोड़ दिया। अप्रत्याशित स्थिति को देखते हुए विपक्ष की मांग पर स्पीकर ने प्रश्नकाल के बीच इस चर्चा को अनुमति दे दी। चर्चा के बाद विपक्षी दल भाजपा ने सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया। हालांकि यह जवाब फिर नहीं आया कि कर्मचारियों और पेंशनरों को सैलरी और पेंशन कब मिलेगी?

मंगलवार को 11 बजे सदन शुरू होते ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, लेकिन इसी बीच नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और कुछ अन्य विधायकों ने अपनी बात कहनी चाही। स्पीकर कुलदीप पठानिया ने विशेष हालातों का जिक्र कर नेता प्रतिपक्ष को अपने शब्दों को लेकर अलर्ट रहने की हिदायत के साथ अनुमति दी। जयराम ठाकुर ने कहा कि सदन में इस तरह का टकराव पहली बार नहीं है, लेकिन सिर्फ विपक्ष को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एक तरफ विपक्ष के विधायक स्पीकर के व्यवहार से दुखी हैं और दूसरी तरफ राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों को भुगतान नहीं हो रहा। कर्मचारियों की दिक्कतों पर नियम 67 के तहत दिए गए नोटिस को इग्नोर किया गया। विपक्ष इस स्थिति को लेकर गंभीर है। इससे महत्वपूर्ण विषय और नहीं हो सकता था। विधानसभा अध्यक्ष को भी अपने शब्दों को वापस लेने में कोई हर्ज नहीं है।

इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने कहा कि सरकार भी चाहती है कि सदन चले, इसीलिए 10 दिन का मानसून सत्र पहली बार बुलाया गया। कल विपक्ष ने काम रोको प्रस्ताव तो दिया लेकिन उसे पर बोले ही नहीं। विपिन परमार ने सीधा हमला स्पीकर पर कर दिया। सत्र में अधिकतर एजेंडा विपक्ष कहीं लगा हुआ है। जवाब में भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने खुद तीन बार उठकर कर्मचारियों के वेतन को लेकर दिए गए नोटिस का हवाला दिया लेकिन माइक ही ऑन नहीं किया गया। मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि सदन नियमों के अनुसार ही चलना चाहिए। प्रश्नकाल को टालना ठीक नहीं है। भाजपा विधायक विपिन परमार ने कहा कि कांग्रेस के विधायक ऐसी बात कर रहे हैं, जैसे नियमों की जानकारी सिर्फ उन्हें है। एक तरफ सैलरी रोक दी है और दूसरी तरफ सपने दिखाए जा रहे हैं कि 2027 में हिमाचल गुलजार हो जाएगा।

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सदन के भीतर स्पीकर से ऊपर कोई नहीं है। इसीलिए विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव जैसे नोटिस देने से पहले सोचना चाहिए। राजभवन जाकर भी कुछ नहीं होगा। हमने तो इसी विधानसभा में देशद्रोह का मुकदमा झेला है और अभी भी चल रहा है। सतपाल सती ने मुख्यमंत्री को अलर्ट किया कि आपके ही दल में कुछ लोग नहीं चाहते कि सदन चले। इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि विपक्ष को सदन में ज्यादा समय मिला है। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि ये जिस भी नियम में चर्चा चाहते हैं, सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन यह नियमानुसार हो। प्रश्नकाल को चलने दें। यदि कर्मचारी या वेतन पेंशन के मामले पर ये नियम 67 में चर्चा चाहते हैं तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। इसके बाद स्पीकर ने इस चर्चा का जवाब दिया।

सदन में निष्पक्ष हूं, बाहर दिया बयान राजनीतिक : पठानिया

– विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर भी स्पीकर ने दी रूलिंग

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि सदन के भीतर वह निष्पक्ष हैं। वह लोकतंत्र में भरोसा रखते हैं और डेमोक्रेट के नाते ही व्यवहार करते हैं। विधानसभा के भीतर विपक्ष को ज्यादा समय इसलिए मिलता है, क्योंकि जनता के मुद्दे उठाना विपक्ष का काम है। अपने काम या व्यवहार में विधानसभा के अंदर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। उनके चुनाव क्षेत्र के लोगों ने पांचवीं बार जिन परिस्थितियों में जीताकर भेजा है, यह सबकी किस्मत में नहीं होता। स्पीकर ने कहा कि विधानसभा के बाहर जो उन्होंने बयान दिया वह ऐसे समय का है, जब ऐसा लगता था कि सरकार कभी भी जा सकती है। यह बयान राजनीतिक था और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल उठाने के लिए था।

यदि किसी को बुरा लगा हो तो सदन से बाहर मीडिया ब्रीफिंग में कुछ कह दूंगा। उन्होंने मीडिया को भी विधानसभा की रिपोर्टिंग नियम अनुसार करने की हिदायत दी। स्पीकर ने कहा कि वह 10 साल पहले ही सदन में थे। तब स्थितियां कुछ और थी। अब वक्त बदल गया है। उन्होंने भाजपा के नियम 274 के तहत दिए अविश्वास प्रस्ताव पर भी रूलिंग दी। स्पीकर ने कहा कि यह नोटिस 24 विधायकों की तरफ से दिया गया है, लेकिन इसमें लगाए गए आरोप पात्रता नहीं रखते। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार इस नोटिस की तय अवधि 14 दिन है, जबकि ये सत्र ही 9 सितंबर तक है। इसलिए इस नोटिस का कोई महत्व नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

कांग्रेस के गिरते जनाधार से बौखलाए विक्रमादित्य सिंह : राकेश जमवाल

रामपुर, सुन्नी और अपने क्षेत्र में हार से परेशान...