कांग्रेस को संविधान की दुहाई देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं, आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार था : सुरेश भारद्वाज

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25 जून 1975 को देश को जेल में बदल दिया गया, कांग्रेस ने मौलिक अधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटा

शिमला, 24 जून। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि आज कांग्रेस के नेता हाथ में संविधान की छोटी पुस्तक लेकर देशभर में घूमते हैं और भारतीय जनता पार्टी पर संविधान विरोधी होने के आरोप लगाते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि संविधान और लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला कांग्रेस ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर किया था। उन्होंने कहा कि यह दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए पूरे देश को एक प्रकार से जेल में परिवर्तित कर दिया था।

सुरेश भारद्वाज ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में तीन घटनाएं ऐसी हैं जिन्होंने देश की आत्मा को झकझोर दिया। पहली देश का विभाजन, दूसरी 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल और तीसरी 1984 में सिख विरोधी दंगे। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की रात तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से आपातकाल की घोषणा करवाई गई और देशवासियों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई, विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया और आम नागरिकों तक को प्रताड़ित किया गया।

उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 12 जून 1975 को इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त किए जाने के बाद लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया अपनाने के बजाय कांग्रेस ने आपातकाल का रास्ता चुना। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, जॉर्ज फर्नांडिस, चंद्रशेखर और हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं को मीसा (MISA) के तहत जेलों में बंद कर दिया गया। उस समय “ना दलील, ना वकील, ना अपील” की स्थिति थी।

भारद्वाज ने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान में 39वां और 42वां संशोधन कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया। लोकसभा और विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाया गया, न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित किया गया और प्रधानमंत्री सहित शीर्ष पदों के चुनावों को न्यायिक समीक्षा से बाहर करने की कोशिश की गई। इसके अतिरिक्त जबरन नसबंदी अभियान चलाया गया और सरकारी कर्मचारियों को लक्ष्य देकर लोगों पर अत्याचार किए गए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ और लोकतंत्र समर्थक संगठनों ने उस दौर में संघर्ष किया और हजारों कार्यकर्ताओं ने जेल यात्राएं कीं। आज वही कांग्रेस संविधान बचाने की बातें कर रही है जिसने सबसे अधिक बार संविधान में संशोधन किए और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया।

सुरेश भारद्वाज ने कहा कि भाजपा 25 जून को पूरे देश में “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाएगी ताकि नई पीढ़ी को बताया जा सके कि लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा हमला किसने किया था। उन्होंने बताया कि शिमला में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करेंगे तथा आपातकाल से जुड़े तथ्यों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। वहीं 27 जून को पालमपुर में पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार मुख्य वक्ता होंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों और उनके परिजनों को भी सम्मानित किया जाएगा।

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