डिप्टी रेंजर-फोरेस्ट गार्ड पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई

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मंडी में अवैध कटान मामले में हाई कोर्ट सख्त, वन विभाग से 30 सितंबर तक मांगा जवाब

आवज जनादेश / न्यूज ब्यूरो शिमला

प्रदेश हाई कोर्ट ने वन विभाग के डिप्टी रेंजर और फोरेस्ट गार्ड को कत्र्र्तव्यों में कोताही बरतने का दोषी पाए जाने के बावजूद केवल जुर्माना वसूलने की सजा देने के कारण स्पष्ट करने के आदेश जारी किए है। वन विभाग ने डिप्टी रेंजर धर्म पाल और फोरेस्ट गार्ड विजय कुमार को विभागीय कार्रवाई में चैलचौक मंडी के समीप सैकड़ों पेड़ों के कटान के दौरान कत्र्तव्यों में लापरवाही बरतने का दोषी पाया था। विभाग ने उक्त दोनों कर्मियों से सजा के तौर पर सात लाख 92 हजार 960 रुपए का जुर्माना वसूलने के आदेश जारी किए थे। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने वन विभाग से पूछा है कि इन दोषी कर्मियों पर बड़े दंड की सजा के साथ-साथ सीसीएस नियम 1965 के तहत कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने पूछा है कि इन कर्मियों से वरिष्ठ कर्मियों के खिलाफ कोई जांच क्यों नहीं की गई जबकि उनका नाम उक्त दोषी कर्मियों के खिलाफ जांच के दौरान उजागर हो गया था। कोर्ट ने वन विभाग को यह जानकारी 30 सितंबर तक देने के आदेश जारी किए।

हाईकोर्ट ने फोरेस्ट रेस्ट हाउस चैल चौक मंडी के नजदीक सैकड़ों पेड़ काटकर एक बड़ा मैदान बनाए जाने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई को पूछा था कि जब पेड़ सैकड़ों पेड़ कट रहे थे तो वन विभाग ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि कैसे फोरेस्ट रेस्ट हाउस के साथ का बहुत बड़ा भाग वन विभाग की जानकारी के बिना खाली कर दिया गया। काटे गए पेड़ों की जगह फिर से नए पौधे क्यों नहीं लगाए गए हैं। हाई कोर्ट ने स्थानीय निवासी राजू द्वारा मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लिया है। प्रार्थी ने वन और पर्यावरण विनाश व सरकारी संपदा को नष्ट होने से न बचाने के लिए डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

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