विधानसभा में मानसून से नुकसान पर चर्चा बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के 12 सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र में हुए नुकसान की बात सदन में रखी। इस दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा, तो विपक्ष ने प्रदेश सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। इस चर्चा के बीच सदस्यों ने आपदा से निपटने के लिए उचित कदम उठाने की भी सलाह दी। सदन की कार्यवाही समाप्त होने तक चर्चा जारी रही।
आवाज जनादेश/न्यूज ब्यूरो शिमला
सात लाख का वादा, तीन की मदद
विधायक विनोद कुमार ने कहा कि जहां नुकसान हुआ है, वहां सरकार गंभीरता से विचार करें। जब से नई सरकार बनी है तब से आपदा बढ़ गई है। सात लाख रुपए की मदद का आश्वासन दिया था, लेकिन प्रभावित परिवारों को तीन-तीन लाख रुपए की ही मदद की गई है। बहुत से लोगों ने बैंक से लोन लेकर घर बना लिए हैं। लेकिन अभी तक उन्हें दूसरी किस्त नहीं दी गई है। जमीन भी नहीं मिल पाई है।
सेब सीजन में सरकार ने दी राहत
सीपीएस मोहन लाल ब्राक्टा ने कहा कि पिछले साल आपदा से भंयकर नुकसान हुआ। सरकार ने इसके बावजूद युद्धस्तर पर काम किया और 48 घंटे में सडक़ें बहाल कर दी थीं। सेब सीजन में बड़ी राहत मिली। 15 अगस्त तक सभी सडक़ों को खोलने के आदेश मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिए थे। इसका लाभ सेब कारोबारियों को मिला। पूरे सीजन में सप्लाई प्रभावित नहीं हुई है।
बद्दी-नालागढ़ में बने फ्लाईओवर
सीपीएस रामकुमार ने कहा कि कसौली डिवीजन की 18 करोड़ की देनदारी है। सडक़ निर्माण के लिए पैसे मुहैया करवाए जाएं। जो मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें सात लाख रुपए दिए जाएं और जिनकी जमीन गई है, उनके लिए नई जगह मुहैया करवाई जाए। नेशनल हाईवे पर ड्रेनेज नहीं है। इससे पानी फंस रहा है। बद्दी से नालागढ़ तक फ्लाई-ओवर बनाया जाए।
बरसात से पहले एक्शन प्लान नहीं
विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि इस साल भी आपदा का सामना करना पड़ रहा है। आपदा में जो पैकेज की घोषणा की गई थी, वास्तविकता में यह पैकेज नहीं मिला है। राज्य सरकार ने देश या विदेश से विशेषज्ञ की कोई मीटिंग नहीं की। पिछले साल की आपदा में 500 और इस बार 70 लोगों की जान जा चुकी है। बरसात आने से पहले न तो एक्शन प्लान बना और न ही किसी कमेटी का गठन किया गया। सरकार को आत्मचिंतन की जरूरत है।
मदद से हाथ पीछे खींच रहा केंद्र
विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि पिछले साल आपदा के समय सेब सीजन चल रहा था, लेकिन राज्य सरकार के प्रयास से सेब बाजार तक पहुंचा। केंद्र से हिमाचल को कोई मदद नहीं मिल सकी। केंद्र सरकार की योजनाओं के पैसे मदद में जोड़े जा रहे हैं। बरसात में जो सडक़ें प्रभावित हुई हैं, वे भाजपा के समय बनी थी। केंद्र के बजट में हिमाचल का जिक्र तो आया, लेकिन मदद कैसे मिलेगी, यह तय नहीं किया गया।
बर्फबारी वाले इलाकों में रोड बनें
विधायक बलबीर वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना आने के बाद चौपाल में सडक़ें बनी। पीडब्ल्यूडी की सडक़ों का मलबा नालों में फेंका गया। पीडब्ल्यूडी की सडक़ में बिना स्लैब कोई कलवर्ट न बने। स्नो बांड एरिया में सडक़ निर्माण की व्यवस्था को बदला जाना चाहिए। जेसीबी से बर्फ नहीं हटाई जा सकती है, लेबिन बुल्डोजर से बर्फ हटानी पड़ती है। ऐसे में सडक़ की सतह का मजबूत होना जरूरी है।
लोगों को सुरक्षित घर चाहिए
विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने कहा कि पुनर्वास के लिए जिन लोगों को जमीन नहीं मिल पा रही है, उनके लिए कदम उठाने की जरूरत है। आपदा प्रभावितों को मॉड्यूलर घर बनाकर लोगों को देने की जरूरत है। इसके अलावा सेफ हाउस बनाने की जरूरत है ताकि आपदा के समय लोगों को ठहराने का प्रबंध किया जा सके। गढख़ल से गुनाई रोड में महज 13. पेड़ कटने हैं। इस सडक़ को आपदा प्रबंधन के तहत बनाया जाना जरूरी है।
बहाल नहीं हुई बंद सडक़ें
सदन में चर्चा के दौरान विधायक दलीप सिंह ने कहा कि पिछले साल की आपदा में बंद सडक़ें आज तक बहाल नहीं हो पाई हैं। एक साल से बसें नहीं चल रही हैं। सरकाघाट में शिवा प्रोजेक्ट के तहत अनार और अन्य पौधे लगे हैं। यहां श्री खड्ड की वजह से भूमि कटाव हो रहा है। अब गांव को खतरा बन गया है। सिंचाई योजना में नुकसान की भरपाई के लिए प्रयास करने की जरूरत है। प्रभावित पंचायतों में भेदभाव हुआ है।
केंद्र सरकार से मदद नहीं मिली
सीपीएस संजय अवस्थी ने कहा कि आपदा में राज्य सरकार ने राहत के लिए कदम उठाए। राष्ट्रीय आपदा घोषित करने पर चर्चा के दौरान विपक्ष पीछे हटा था। विपक्ष ने उस समय सरकार का साथ नहीं दिया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा के दौरान खुद राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की और लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई। ग्रामीण इलाकों में निर्माण को नियोजित करने की जरूरत है। केंद्र सरकार से कोई राहत राशि नहीं मिली है।
प्रभावितों को जमीन दे सरकार
विधायक नंद लाल ने कहा कि बादल फटने की घटना से भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। रामपुर में बादल फटने की घटना से भारी नुकसान हुआ है। हादसे के बाद लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया। बागीचों में भारी नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार ने सात लाख रुपए का प्रबंध मकान बनाने का फैसला किया है, लेकिन जिन लोगों के पास जमीन नहीं बची है, उनके लिए सुरक्षित जगह मुहैया करवाई जाए।
खड्डों की चैनेलाइजेशन करे सरकार
विधायक बावा हरदीप सिंह पिछले साल आई बरसात में नालागढ़ में भारी नुकसान हुआ था। 36 परिवारों को राज्य सरकार ने राहत दी। अब मकानों के नुकसान का आंकड़ा बढ़ गया है। अब दोबारा से सर्वे किया जाए और लोगों को राहत दी जाए। सभी खड्डों पर चैनेलाइजेशन की जरूरत है, ताकि लोगों को राहत मिल सके। आइपीएच विभाग योजना तैयार करें। दभोटा में पुल बह गया है। इस पुल की भरपाई नहीं हो पाई है।
जोगिंद्रनगर में सडक़ें बदहाल
विधायक प्रकाश राणा ने कहा कि जोगिंद्रनगर कें सडक़ें बदहाल हैं। जगह-जगह सडक़ें बह गई हैं और लोगों को आवाजाही में मुश्किल पेश आ रही है। उन्होंने कहा कि सडक़ किनारे नालियां बनाने के लिए साढ़े सात करोड़ रुपए की धनराशि का भी दुरुपयोग हुआ है। अब आलम यह है कि सडक़ पूरी तरह से खत्म हो चुकी है और सडक़ के बीचोंबीच नालियां बन गई हैं।


