पर्यावरण संरक्षण समय की मांगः न्यायमूर्ति संजय करोल

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आवाज़ जनादेश सोलन /शिमला

ग्राम पंचायत कुंहर में देवदार का पौधा लगाकर पौधरोपण कार्यक्रम का शुभारंभ

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल ने युवाओं का आह्वान किया है कि पर्यावरण संरक्षण न केवल समय की मांग है, अपितु यह पृथ्वी पर मानव जीवन के अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है। न्यायमूर्ति संजय करोल सोलन जिले के अर्की उपमण्डल की ग्राम पंचायत कुंहर के घड़ियाच में विधिक जागरूकता एवं पौधरोपण कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के तत्वावधान में किया गया।

 न्यायमूर्ति संजय करोल ने देवदार का पौधा लगाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

न्यायमूर्ति संजय करोल ने कहा कि प्राचीन समय में वनों एवं वन्य जीवों तथा वनस्पति का संरक्षण सभी का सामूहिक उतरदायित्त्व होता था एवं वनों को जीवनदायी देवता के रूप में माना जाता था। भारतीय संस्कृति में वृक्षों की देव रूप में पूजा का मुख्य कारण भी पर्यावरण संरक्षण ही है। जल, जंगल एवं जमीन का संरक्षण भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के वनों की सुरक्षा के अनुभव वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं।

प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य कार्यवाहक न्यायाधीश ने ग्रामीणों का आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र के पारम्परिक जल स्त्रोतों एवं भूमि का संरक्षण भी सुनिश्चित बनाएं।

न्यायमूर्ति संजय करोल ने कहा कि युवा देश का भविष्य है और हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि युवाओं की असीमित उर्जा को देशहित में लगाया जाए।

प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हरित आवरण आवश्यक है। हरित आवरण में सत्त वृद्धि के लिए हमें न केवल वृक्षों के अवैज्ञानिक एवं अंधाधुंध कटान पर रोक लगानी होगी अपितु युवाओं को वन संरक्षण के महत्व को भी समझाना होगा। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि पर्यावरण संरक्षण के सजग प्रहरी बनें।

इस अवसर पर लगभग 700 लोगों द्वारा 1500 पौधें रोपे गए।

न्यायमूर्ति संजय करोल ने अर्की तहसील के खलनग में पहाड़ी गाय विकास एवं अनुसंधान केंद्र में विभिन्न औषधीय एवं पशु चारा के लिए प्रयुक्त होने वाले पौधें भी रोपे। यहां पर अर्जुन, काचनार, आवंला, सहजन एवं सागवान के पौधे रोपे गए। अनुसंधान केंद्र में रामकमल धार्मिक एवं चैरिटेबल न्यास द्वारा आरोग्य भारती के सहयोग पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इससे पहले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घड़िचाच के ललित कुमार, राजकीय उच्च पाठशाला जघून से राहुल कुमार, राजकीय उच्च पाठशाला लड़ोग से कुमारी सरीता शर्मा तथा रामानुजम वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नवगांव से कुमारी तनु शर्मा ने पर्यावरण तथा पौधरोपण पर अपने विचार रखें। जिसके लिए मुख्यातिथि ने उनकी सराहना की तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उन्हें 11-11 हजार रूपये देने की घोषणा की।

इससे पहले जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोलन भूपेश शर्मा ने मुख्यातिथि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोलन ने जिले में वर्ष2014 से वर्ष 2018 तक विभिन्न स्कूली छात्रों के सहयोग से 95811 पौधे रोपित किए हैं।

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण सोलन के सचिव मोहित बंसल ने धन्यवाद प्रस्तुत किया।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र ठाकुर ने भी अपने विचार रखें।

प्रधान सचिव विधि हिमाचल प्रदेश यशवन्त सिंह चोगल, हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रेम पाल रांटा, सहायक सोलिसिटर जनरल राजेश शर्मा, सिविल जज अर्की के सोनल थामा, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय अधिवक्ता क्रिकेट संघ के अध्यक्ष अनंत शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन विवेक चंदेल, वन मंडलाधिकारी कुनिहार सतीश नेगी, ग्राम पंचायत कुंहर की प्रधान कमलेश कुमारी, उपप्रधान अमर सिंह ठाकुर, जिला न्यायालय सोलन से सम्बन्धित अधिवक्ता, स्थानीय लोग, कांशी राम, नत्थू राम चौहान, पहाड़ी गाय विकास एवं अनुसंधान केंद्र की न्यासी सुषमा सूद एवं कुसुम कुठियाला, राष्ट्रीय सेविका समिति की प्रांत संचालिका राजकुमारी सूद, आरोग्य भारतीय के राष्ट्रीय समन्वयक डा.ॅ राकेश पंडित, जिला अध्यक्ष डॉ अनिल मेहता, अध्यापक, छात्र तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

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