आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
राज्य सचिवालय में गुम हुई एक फाइल ने अफसरों के खूब पसीने छुड़वाए। फाइल ढाई महीने तक प्रदेश सचिवालय में नहीं मिली। जब फाइल नहीं मिली तो इसकी डुप्लीकेट तैयार करनी पड़ी। डुप्लीकेट फाइल तैयार हुई तो यह एक शाखा में फाइलों के बीच पड़ी मिली। इसके बाद इसे हाईकोर्ट में पेश किया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यह फाइल रजिस्ट्रार जनरल की सेफ कस्टडी में है। यह फाइल राज्य उपभोक्ता आयोग और जिला उपभोक्ता आयाेगों में सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित है।
दरअसल इस फाइल को उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना था। जब खोजने पर भी नहीं मिली तो खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अनुभाग अधिकारी सुशील कुमार की तरफ से सभी शाखा और अनुभाग अधिकारियों को एक पत्र एफडीएस-बी(2)-2/2022-1 लिखा गया। इस पत्र के जारी होने के बाद सभी शाखाओं में इस फाइल की खोजबीन शुरू की गई। इस साल 17 अप्रैल को लिखी चिट्ठी के अनुसार इस फाइल को ट्रेस करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए। फाइल फरवरी से लेकर गुम थी। इसमें नोटिंग शीट, चयन समिति के प्रस्ताव आदि हैं। चयन समिति की बैठक हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में हुई।
वहीं अतिरिक्त मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले आरडी नजीम ने बताया कि फाइल को खोज लिया गया है। इसे कोर्ट में प्रस्तुत कर दिया गया है। इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। वहां से फाइल मांगी गई थी।
क्या है मामला
हिमाचल प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग और जिला उपभोक्ता आयोग में सदस्यों के 2 पद भरे जाने हैं। वहीं, जिला उपभोक्ता आयोगों में शिमला में 2, नाहन में भी 2, मंडी में 1 और ऊना में 1 सदस्य की नियुक्ति की जानी है। हाईकोर्ट में इस संबंध में एक पीआईएल फाइल हुई है। इस मामले की सुनवाई 13 मई को होगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने चयन समिति की सिफारिशों को खारिज किया है।


