आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
हिमाचल सरकार सजावटी मछली के व्यवसाय को गति प्रदान करने के लिए नई योजना पर काम कर रही है। इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को सजावटी मछली पालने व एक्वेरियम के रखरखाव को लेकर ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित कर ट्रेंड किया जा रहा है। मत्स्य बीज फार्म कांगड़ा और मत्स्य बीज फार्म दयोली बिलासपुर में आगामी वर्ष से सुनहरी मछली की अन्य प्रजातियों का प्रजनन शुरू किया जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि सजावटी मछली की विभिन्न प्रजातियां प्रदेश में उपलब्ध होंगी और इस व्यवसाय में नई जान आएगी। मत्स्य विभाग की ओर से एक्वेरियम व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। विभाग के निदेशक विवेक चंदेल की अध्यक्षता में संपन्न हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को सजावटी मछली पालने व एक्वेरियम के रख-रखाव के बारे में जानकारी प्रदान की गई। विवेक चंदेल ने बताया कि विभाग सजावटी मछली के कारोबार को लेकर सजग है, लेकिन जानकारी के अभाव में यह व्यवसाय उचित गति नहीं पकड़ पा रहा है। घरों के साथ-साथ कार्यालयों में भी लोगों ने एक्वेरियम तो लगाए हैं, लेकिन उनका रख-रखाव सही ढंग से नहीं कर पाते हैं, जिस कारण मछलियां बीमार हो जाती है और ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह पाती हैं। इसके अतिरिक्त इस व्यवसाय में लोगों को क्या-क्या समस्याएं आ रही हैं, इसका भी पता लगाया जा रहा है।
निकट भविष्य में इन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मत्स्य निदेशालय बिलासपुर के सहायक निदेशक पंकज ठाकुर और सहायक निदेशक डा. सोमनाथ ने पानी में ऑक्सीजन लेवल, मछली के भोजन व मछली को भोजन देने के समय और मछलियों को होने वाली बीमारियों के संदर्भ में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में गोल्ड फिश, गप्पी, ब्लैक मौली इत्यादि प्रजाति की सजावटी मछलियों का प्रजनन करवाया जा रहा है। एक्वेरियम व्यवसायियों द्वारा अवगत करवाया गया है कि सजावटी मछली की अधिकतर प्रजातियां प्रदेश के बाहर से क्रय करनी पड़ती हैं, जिस पर निदेशक विवेक चंदेल ने स्पष्ट किया कि मत्स्य बीज फार्म कांगड़ा व मत्स्य बीज फार्म दयोली (घागस) जिला बिलासपुर में आगामी वर्ष में सुनहरी मछली की अन्य प्रजातियों का प्रजनन करवाया जाएगा, ताकि सजावटी मछली की यह प्रजातियां प्रदेश में उपलब्ध हो सके। विवेक चंदेल के अनुसार विभाग द्वारा बिलासपुर समेत अन्य जिलों के एक्वेरियम व्यवसायियों को भी जागरूक किया जाएगा। (एचडीएम)


