मौत को गले लगाने वालों में अधिकतर कम पढ़े-लिखे, 642 में सुसाइड करने वाले 40 लोग पूरी तरह अशिक्षित
आवाज जनादेश/न्यूज ब्यूरो शिमला
अच्छी व उच्च शिक्षा लोगों की मानसिकता में बदलाव लाती है और परेशानियों, तनाव व दबाव से जूझने का रास्ता दिखाती है। यही कारण है कि कम पढ़े-लिखे लोगों में आत्महत्या करने की प्रवृति अधिक पाई जा रही है। विभिन्न शोध भी कुछ ऐसा ही सिद्ध कर रहे हैं, तो प्रदेश में सुसाइड करने वालों का आंकड़ा भी ऐसे ही प्रमाण दे रहा है। प्रदेश में सुसाइड करने वालों और उनके शिक्षित होने का आंकड़ा हैरानीजनक है। राष्ट्रीय स्तर पर जारी 2022 के आत्महत्या के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में आत्महत्या करने वाले कुल लोगों में से 90 फीसदी से अधिक ऐसे रहे जो सिर्फ जमा दो तक पढ़े- लिखे थे। यानी स्कूली शिक्षा से अधिक पढऩे वाले लोगों में सुसाइड करने की प्रवृत्ति कम पाई गई है। जानकारी के अनुसार असमय विभिन्न कारणों से मौत को गले लगाने वाले 644 लोगों में से 589 ऐसे थे, जिन्होंने सिर्फ जमा दो कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की थी। कालेज व प्रोफेशनल स्तर पर शिक्षित लोगों में सुसाइड का ट्रेंड अपेक्षाकृम कम पाया गया है।
आंकड़े बताते हैं कि 642 में सुसाइड करने वाले 40 लोग पूरी तरह अशिक्षित थे, जिसमें 28 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल थीं। आत्महत्या करने वाले 34 पुरुषों और 15 महिलाओं सहित कुल 49 लोग ऐसे सामने आए, जिन्होंने पांचवीं तक शिक्षा प्राप्त की थी। इसी कड़ी में 119 लोग ऐसे रहे जो आठवीं तक पढ़े थे और इनमें 78 पुरुष और 41 महिलाएं शामिल थी। दसवीं कक्षा तक पढ़े-लिखे सुसाइड करने वालों का आंकड़ा सबसे अधिक 215 रहा, जिसमें 172 पुरुष और 43 महिलाएं शामिल थी। वहीं, जमा दो तक शिक्षा प्राप्त करने वालों का आंकड़ा भी 100 से अधिक रहा और 125 परुषों और 41 महिलाओं सहित कुल 166 लोगों को मौत को गले लगाया। -एचडीएम
अच्छे शिक्षित दस फीसदी से कम
सुसाइड करने वाले जमा दो से अधिक शिक्षित लोगों का आंकड़ा दस फीसदी के कम रहा। आंकड़ों के अनुसार सुसाइड करने वाले 644 में से मात्र 37 लोग ऐसे थे जो ग्रेजुएट थे। इनमें 21 पुरुष और 16 महिलाएं शामिल रही। सुसाइड करने वाले कुल 644 लोगों में पुरुषों का आंकड़ा 471 और महिलाओं की संख्या 173 रही।


