प्राचीन मन्दिरो के अस्तित्व गोबिंद सागर झील में जलमग्न
03/07/2019
आवाज जनादेश
साहयोगी
आज तक केसरी
हिमाचल प्रदेश
बिलासपुर
सुनील ठाकुर
भाखड़ा बांध के अस्तित्व में आने के उपरान्त गोविन्द सागर झील में जलमग्न हुए आठवीं शताब्दी के प्राचीन मंदिरों के पुनर्स्थापन की बंधी उम्मीद,इनरेस्ट आफ एक्सपरेशन के तहत इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हैरीटेज एंड डिवैल्पमैन्ट(आईएचआरडी)नई दिल्ली से पांच सदस्यीय दल व दे डिजाईन एजैंसी जयपुर से एक सदस्य द्वारा जलमग्न मन्दिरों व चिन्हित जमीन का स्थल का किया निरीक्षण।गोविन्द सागर झील में जलमग्न हुए आठवीं शताब्दी के प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का निरीक्षण करते हुए टीम के सदस्यों के व प्राचीन मंदिरों के दृश्य।बिलासपुर के सांढू मैदान स्थित पुराने शहर के प्रचीन एवं ऐतिहासिक मंदिरों के पुर्नस्थापन को लेकर अब उम्मीदें लगनी शुुरू हो गई हैं।गौरतलब है कि आठवीं शताब्दी के यह प्राचीन मंदिर भाखड़ा बांध के अस्तित्व में आने के उपरान्त गोविन्द सागर झील में जलमग्न हो गए थे इन मंदिरों के सर्वेक्षण के लिए गत दिनों से दिल्ली व जयपुर राजस्थान से आई दो टीम सर्वेे कर लौट गई हैं।इन दोनों टीमों ने इन मंदिरों के पुर्नस्थापन के सकाराम्त्मक संकेत दिए हैं।भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा बिलासपुर जिले के गोबिन्द सागर झील में जलमग्न मन्दिरों के पुनर्स्थापन के लिए रूचि प्रकटन(इनरेस्ट आफ एक्सपरेशन )आंमत्रित किया गया था।सचिव,भाषा-संस्कृति,निदेशक भाषा संस्कृति एवं उपायुक्त राजेश्वर गोयल के सकारात्मक प्रयासों से दो एजैंसियों ने यहां पर इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हैरीटेज एंड डिवैल्पमैन्ट (आईएचआरडी) नई दिल्ली से पांच सदस्यीय दल व दे डिजाईन एजैंसी जयपुर से एक सदस्य द्वारा जलमग्न मन्दिरों व चिन्हित जमीन का स्थल निरीक्षण
व सर्वे किया।इस सर्वे के दौरान जिला भाषा एवं संस्कृति अधिकारी नीलम चंदेल एवं पुरातात्विक अभियंता सीएल कश्यप भी मौजूद रहे।इन दोनों एजैंसियों को जिला भाषा एवं संस्कृति अधिकारी नीलम चन्देल एवं पुरातात्विक अभियंता सीएल कश्यप भी मौजूद रहे इन दोनों एजेंसियों को जिला भाषा अधिकारी द्वारा मन्दिरो के इतिहास के बारे मे भी जानकारी दी इन टीमो ने इन 8 मंदिरों को काले बाबे की कुटिया के समीप चयनित भूमि का भी निरीक्षण किया गया काबिलेगोर है कि बिलासपुर मे पिछले काफी अर्से से गोबिंद सागर झील जलमग्न मन्दिरो के पूर्णस्थापन की मांग विभिन्न सामाजिक संस्थायों द्वारा उठाया जा रहा था लेकिन इस मन्दिरो के पुर्नस्थापन नही हुआ हालांकि वर्ष 2011मे भी इन मन्दिरो को लेकर एक सर्वे हुआ था जो सिरे नही चढ़ पाया था सरकार द्वारा इस सम्बंध मे ASI(पुरातत्व विभाग)से भी सर्वे करवाने के प्रयास हुए लेकिन उसमें कोई खास सफलता नही मिली अब इन दोनों एजेंसियों ने इस मन्दिरो के पूर्नस्थान होने के संकेत दिए हैं उधर जिला भाषा अधिकारी नीलम चन्देल का कहना है कि इंडियन ट्रस्ट रूरल हैरिटेड एवं डिवलपमेंट(IHRD)नई दिल्ली से पांच संसदीय दल व दे डिज़ाइनर एजेंसी जयपुर से टीम को रुचि प्रकटन के तहत31जुलाई तक अपने सुझाव अथवा रिपोट देनी होगी इसके उपरांत जो भी एजेंसी इसकी शर्तो के अनुरूप पात्र होगी वह बाद मे जलमग्न मन्दिरो के पुर्नस्थापन का कार्य करेंगे उन्होंने कहा कि प्राचीन बिलासपुर की धरोहर को बचाने के लिए विभाग बहूत समय से प्रयासरत है अभी तक जलमग्न मन्दिरो में 8 मंदिर ही शेष बचे हैं जोकि जमीन पर दिखाई देते है इन 8 मन्दिरो को काले बाबे की कुटिया के समीप चयनित भूमि पर पुर्नस्थापित किया जाएगा
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