मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव मंजूर ,शुक्रवार शाम को मतदान

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नई दिल्ली—   मनसून सत्र पहला घंटा ही हंगामे की भेंट चढ़ गया। सुमित्रा महाजन ने प्रश्नकाल की घोषणा की और इसके खत्म होते ही टीडीपी ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। जिसे स्वीकार करते हुए संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा वह इसपर चर्चा के लिए तैयार हैं। मोदी सरकार के खिलाफ तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) की ओर से पेश अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में चर्चा के लिए बुधवार को स्वीकार कर लिया गया और इस पर चर्चा तथा मतदान शुक्रवार को कराया जाएगा। उस दिन सदन में न तो प्रश्नकाल होगा और न ही गैर-सरकारी कामकाज। सुबह 11 बजे से चर्चा शुरू की जाएगी और उसी दिन प्रस्ताव पर मतदान भी कराया जाएगा। मोदी सरकार के चार साल से ज्यादा के कार्यकाल में उसके खिलाफ पहली बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। सरकार भी अविश्वास के मुद्दे पर तैयार है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके, लेकिन टीडीपी और विपक्ष का यह प्रस्ताव गिरना तय है। भाजपा-एनडीए के पक्ष में 350 से ज्यादा सांसद हैं, जबकि बहुमत के लिए 268 सांसदों का समर्थन चाहिए। मानसून सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल के बाद जरूरी कागजात सदन पटल पर रखवाने के बाद अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन को सूचित किया कि उन्हें तेदेपा के के श्रीनिवास, थोटा नरसिम्हन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पाटी के तारिक अनवर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मोहम्मद सलीम, कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल तथा रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एनके प्रेमचंद्रन की ओर से अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस मिले हैं। उन्होंने कहा कि श्री श्रीनिवास का प्रस्ताव सबसे पहले मिला है, इसलिए वह उन्हें प्रस्ताव पेश करने की अनुमति दे रही हैं। इस पर श्री श्रीनिवास ने एक पंक्ति का अपना प्रस्ताव पढ़ा, जिसमें कहा गया कि यह सभा सरकार के खिलाफ अविश्वास व्यक्त करती है। इसके बाद अध्यक्ष ने जानना चाहा कि सदन में कितने सदस्य प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। विभिन्न दलों के 50 से अधिक सदस्यों के प्रस्ताव के समर्थन में खड़े होने पर उन्होंने कहा कि वह प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार करती हैं, लेकिन चर्चा का दिन और समय बाद में तय किया जाएगा। भोजनावकाश के बाद श्रीमती महाजन ने सदन को सूचित किया कि प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान 20 जुलाई को करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि उस दिन सुबह न तो प्रश्नकाल होगा और न ही गैर-सरकारी कामकाज। तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने चर्चा का दिन 20 जुलाई रखने का विरोध करते हुए कहा कि अगले दिन 21 जुलाई को पार्टी की ओर से पश्चिम बंगाल में ‘शहीद दिवस’ मनाया जाना है, जिसके लिए सदन के सदस्यों को वहां जाना होगा। पार्टी सदस्य दिनेश त्रिवेदी ने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि प्रस्ताव पर चर्चा आगामी सोमवार को कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव है और एक दल के 35 सांसद सदन से अनुपस्थित रहेंगे, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होगा। श्री खड़गे ने भी उनकी बात का समर्थन किया, लेकिन अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने इस बारे में अपना निर्णय दे दिया है और अब इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। लोकसभा में फिलहाल नौ सीटें खाली हैं। यानी बहुमत 534 सीटों पर ही चाहिए,जो 268 बनता है। लोकसभा में अकेली भाजपा के ही 273 सांसद हैं और एनडीए की कुल ताकत 358 सांसदों की है। विपक्ष के पाले में 167 सांसद हैं। यदि इस संख्या बल को देखा जाए तो अविश्वास प्रस्ताव का गिरना तय है।  हालांकि सपा के सांसद कह रहे हैं कि अविश्वास प्रस्ताव मोदी सरकार को बेनकाब करने के लिए लाया जा रहा है।

हालांकि सुमित्रा महाजन ने अभी चर्चा के लिए समय नहीं दिया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ यह पहला अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले मार्च में बजट सत्र में भी विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात जोर-शोर से उठी थी लेकिन विपक्ष नंबर गेम में भाजपा के सामने टिक नहीं पाई थी। नंबर गेम के मामले में बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को कोई खतरा नजर नहीं आ रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार आज भी काफी मजबूत बनी हुई है और सरकार के पास एनडीए के सभी सहयोगी दलों को मिलाकर लोकसभा में अधिक सांसद हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि मॉब लिंचिग, किसानों की आत्महत्या, महिलाओं के साथ बढ़ती बलात्कार की घटनाओं, विशेष राज्य की मांग के साथ कई और मामलों  जैसे  नोटबंदी, जीएसटी और बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों घिरी केंद्र सरकार अविश्वास प्रस्ताव से खुद को कैसे बचाती है। वैसे सदन में मजबूत दावेदारी होने के बाद सरकार बच तो जाएगी लेकिन जनता की अदालत से खुद को कैसे बचाती है। इस पूरे मामले को बारीकी से देख रहे राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सदन में मोदी सरकार पर कोई असर पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है। क्योंकि दोनों ही सदन में BJP मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
 टिक नहीं पाएगा  विपक्ष का प्रस्ताव

लोकसभा में फिलहाल नौ सीटें खाली हैं। यानी बहुमत 534 सीटों पर ही चाहिए,जो 268 बनता है। लोकसभा में अकेली भाजपा के ही 273 सांसद हैं और एनडीए की कुल ताकत 358 सांसदों की है। विपक्ष के पाले में 167 सांसद हैं। यदि इस संख्या बल को देखा जाए तो अविश्वास प्रस्ताव का गिरना तय है।

कौन कहता है विपक्ष के पास नंबर नहीं?

नई दिल्ली — भाजपा ने अपने पार्टी सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर उन्हें अविश्वास प्रस्ताव वाले दिन सदन में उपस्थित रहने को कहा है, वहीं यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने भी नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी के पूरे संकेत दे दिए हैं। संख्या बल के दम पर भले ही सरकार आश्वस्त दिख रही हो पर सोनिया गांधी ने अपने बयान से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। बहुमत के सवाल पर सोनिया ने कहा कि कौन कहता है कि यूपीए के पास नंबर नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि पूर्ण बहुमत वाली  लोकसभा में बीजेपी और सहयोगी दलों को  बहुमत के लिए 272 सीटों की जरूरत है, जो भाजपा के पास है। इसका मतलब है कि अविश्वास प्रस्ताव  गिरना लगभग तह है ।

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