गमबूट मिले तो कम होगा साढ़े नौ लाख किसान परिवारों का दर्द, सालाना 100 से ज्यादा लोग बनते हैं फनियर का शिकार
आवाज जनादेश/न्यूज ब्यूरो शिमला
हर नागरिक को सामाजिक सुरक्षा देने वाले हिमाचल में साढ़े नौ लाख मेहनतकश किसान परिवार अब भी जान पर खेलकर अनाज उगाने पर मजबूर हैं। लाखों किसान तीन महीने की बरसात में अढ़ाई सौ किस्म के कीड़ों के बीच नंगे पांव खेती करते हैं। इससे प्रदेश में 100 से ज्यादा लोग अकेले सर्पदंश से अपनी जान गंवा देते हैं, तो पिस्सू के काटने से स्क्रब टायफस जैसी जानलेवा बीमारी भी सैकड़ों लोगों को घेर लेती है। बिच्छू, रंगड़ और अन्य कीड़ों को मिला लें, तो हजारों ऐसे मरीज अस्पताल आते हैं, जिन्हें पांव या जांघ में घाव मिला होता है। स्नेकबाइट या अन्य कीड़ों के कारण काल का ग्रास बनने वालों में ज्यादातर किसान होते हैं। ऐसे में अब मांग उठने लगी है कि किसानों को प्रदेश सरकार निशुल्क या सबसिडी पर गमबूट मुहैया करवाए।
प्रदेश सरकार अगर किसानों को गमबूट, रेन बूट या वाटर प्रूफ शूज देती है, तो इससे लाखों जिंदगियां महफूज होंगी, साथ ही हिमाचल के सामाजिक ढांचे को भी नई ताकत मिलेगी। मौजूदा समय में प्रदेश में 9 लाख 68 हजार किसान रजिस्टर्ड हैं, जो सकल घरेलू उत्पाद में 22 प्रतिशत योगदान देते हैं। खेती से 70 फीसदी आबादी को सीधा रोजगार भी मिलता है। देश की राष्ट्रीय औसत से हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय अगर 49 हजार ज्यादा है, तो इसमें किसानों-बागबानों का सबसे बड़ा रोल है। किसान राजेश, रमेश, संजीव ने कहा कि किसानों को सस्ते या फ्री गमबूट देकर प्रदेश सरकार को व्यवस्था परिवर्तन की नई पहल करनी चाहिए। प्रदेश की सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार अगर ऐसी पहल करती है, तो यह व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। (एचडीएम)
आसानी से मिलते रबर बूट
मार्केट में गमबूट आसानी से मिल जाते हैं। बाजार में 900 रुपए में ब्रांडेड गमबूट मौजूद है, तो लोकल कंपनियां चार सौ रुपए में इन्हें बेच रही हैं। सरकार अगर बल्क में गमबूट खरीदेगी, तो ये काफी सस्ते मिलेंगे। हालांकि इस बारे में कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने कहा कि अभी ऐसी कोई प्रोजोजल नहीं है।
इस बार स्क्रब टायफस के 1000 मामले
इस साल प्रदेश में पिस्सू के काटने से होने वाले रोग स्क्रब टायफस के ही 1000 मामले सामने आ चुके हैं। प्रदेश में 21 किस्मों के सांप हैं। इनमें से कॉमन क्रैट, कोबरा और रस्सल वाइपर बेहद जहरीले हैं। सत्तर फीसदी स्नेक बाइट पांव में होता है।


