डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने सदन में खिलाड़ियों के लिए स्वास्थ्य देखरेख एवं सुविधाओं के लिए उठाए गए संरचनात्मक कदमों की जानकारी मांगी।

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युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डाॅ. मनसुख मांडविया ने सदन को बताया कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और सफदरगंज क्रीड़ा आधार केंद्र के मध्य एमओयू हस्ताक्षरित हुआ है जो इसके निष्पादन की तिथि से प्रभावी होगा तथा इसके अंतिम हस्ताक्षर की तिथि से तीन वर्ष की अवधि तक अथवा इसे संशोधित या निरस्त किए जाने तक जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस सहयोग के अंतर्गत साक्ष्य आधारित प्रोटोकाॅल परिकल्पित है जिनमें आघात जोखिम की स्क्रीनिंग, निदान, उपचार, पुनर्वास तथा खेल में वापसी संबंधी प्रक्रियाएं और साथ अस्थि-मासपेशीय आघात, मस्तिष्काघात, लिगामेंट टेंडर तथा कार्टिलेज आघात का प्रबंधन भी शामिल है।
केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा धर्मशाला, शिलारू तथा बिलासपुर में प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां संबंधित खेल विधाओं की आवश्यकताओं के अनुसार खिलाड़ियों को खेल विज्ञान संबंधी सहायता प्रदान की जाती है। खेल विज्ञान विभाग द्वारा खेल विशिष्ट आवश्यकताओं, संस्थागत जरूरतों तथा उपलब्ध संसाधनों के अधीन बिलासपुर सहित चिन्हित केंद्रो में बायोमैकेनिक्स संबंधी सुविधाओं सहित खेल विज्ञान अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण हेतु तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण, राष्ट्रीय खेल विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र के माध्यम से, खेल चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने हेतु बहुत-विषयक एवं साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण अपनाता है। साई ने खेल आघात केंद्र, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरगंज अस्पताल, आईआईटी दिल्ली तथा आयुष मंत्रालय के अधीन मोराजजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के साथ अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास तथा नैदानिक विशेषज्ञता के क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग स्थापित किया है। इस सहयोगात्मक रूपरेखा के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, फेलोशिप, सतत शिक्षा, कार्यशालाएं, नैदानिक प्रशिक्षण एनसीएसएसआर स्कीम के अंतर्गत चिन्हित चिकित्सा महाविद्यालयों में एमडी (खेल चिकित्सा) पाठ्यक्रमों के संचालन हेतु सहयोग प्रदान किया जाता है। साथ ही, आघात महामारी विज्ञान, बायोमैकेनिक्स, व्यायाम शरीर क्रिया विज्ञान, पुनर्वास तथा प्रदर्शन अनुकूलन जैसे क्षेत्रों में सहयोगात्मक अनुसंधान एवं मानकीकृत कार्यप्रणालियों अपनाई जाती हैं जिनमें नैतिक मानकों, प्रतिभागियों की सुरक्षा तथा डाटा की गोपनीयता पर समुचित बल दिया जाता है।

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