उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के मृदा एवं जल संरक्षण अधिकारियों ने किया केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला का भ्रमण

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उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के 27 मृदा एवं जल संरक्षण अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उन्नत आलू अनुसंधान, टिकाऊ उत्पादन तकनीकों तथा कृषि प्रसार गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला का भ्रमण किया। यह दल भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून द्वारा आयोजित 131वें अधिकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत अध्ययन भ्रमण पर आया था। दल का नेतृत्व संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामा पाल ने किया।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए सामाजिक विज्ञान प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार ने केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के इतिहास, उद्देश्य एवं देश में आलू अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में इसकी अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान द्वारा किसानों के लिए संचालित क्षमता विकास कार्यक्रमों, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, डिजिटल परामर्श सेवाओं तथा विभिन्न राज्य विभागों एवं अन्य हितधारकों के सहयोग से विकसित कृषि प्रसार कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना संस्थान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने संस्थान की संगठनात्मक संरचना, प्रमुख अनुसंधान उपलब्धियों तथा भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने अधिक उपज देने वाली, रोग प्रतिरोधी एवं जलवायु-अनुकूल आलू किस्मों के विकास, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन तकनीकों, फसल संरक्षण, कृषि यंत्रीकरण, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा टिकाऊ आलू उत्पादन प्रणालियों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि संस्थान के अनुसंधान प्रयासों से आलू की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि हुई है, स्वस्थ बीज आलू की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है तथा किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने वैज्ञानिकों के साथ आलू उत्पादन तकनीकों, गुणवत्तायुक्त बीज प्रणाली, टिकाऊ फसल प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान के संग्रहालय तथा कुफरी फार्म का भी भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने आलू प्रजनन, बीज उत्पादन एवं फसल सुधार से संबंधित अनुसंधान गतिविधियों का अवलोकन किया।
प्रतिभागियों ने आईसीएआर-सीपीआरआई की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान द्वारा विकसित तकनीकें जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने, संसाधनों के दक्ष उपयोग तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस अध्ययन भ्रमण से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव उनके राज्यों में कृषि विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। अध्ययन भ्रमण का समापन सतत कृषि विकास के लिए संस्थागत सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को और सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ हुआ।

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