मोदी सरकार के 12 वर्ष: जिला शिमला के शोघी गाँव में किसानों ने पेश की प्राकृतिक खेती की अनूठी मिसाल, सामूहिक प्रयास से साकार हो रहा ‘रसायन-मुक्त भारत’ का सपना-प्रोफेसर सिकंदर कुमार

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देश और प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों और अवलोकनों का दौर जारी है। इसी कड़ी में जिला शिमला के शोघी गाँव में स्थानीय नेतृत्व और कृषि विशेषज्ञों द्वारा एक प्रगतिशील कृषि मॉडल का मुआयना किया गया। शोघी गाँव के अग्रणी और प्रगतिशील किसान श्री उमेश शर्मा जी और उनके साथी किसानों द्वारा अपनाई गई प्राकृतिक खेती (Natural Farming) का यह मॉडल आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।
अवलोकन के दौरान शोघी के खेतों में लहलहाती विभिन्न प्रकार की फसलें किसानों की कड़ी मेहनत और आधुनिक-पारंपरिक तकनीक के अनूठे संगम को बयां कर रही थीं। यहाँ किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि 5-6 किसानों ने मिलकर आपसी तालमेल से प्राकृतिक खेती का एक ऐसा आत्मनिर्भर और टिकाऊ मॉडल तैयार किया है, जो आने वाले समय में पहाड़ी राज्यों के लिए कृषि की नई दिशा तय कर सकता है
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘रसायन-मुक्त खेती’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ के संकल्प को इन किसानों ने न केवल अपनाया है, बल्कि उसे धरातल पर उतारकर दिखाया है। रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों को पूरी तरह त्याग कर, इन किसानों ने पारंपरिक और प्राकृतिक तौर-तरीकों (जैसे जीवामृत और घनजीवामृत) से भूमि की उर्वरा शक्ति को पुनर्जीवित किया है।
मुआयने के दौरान किसानों के इस सामूहिक प्रयास की सराहना करते हुए कहा सांसद प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने कहा कि शोघी गाँव के श्री उमेश शर्मा जी और उनके साथी किसानों का यह सामूहिक प्रयास वाकई सराहनीय और प्रेरणादायक है। जब देश मोदी सरकार के 12 वर्षों के सेवा और सुशासन के कालखंड का जश्न मना रहा है, ऐसे समय में धरातल पर पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्यवर्धक कृषि का ऐसा जीवंत उदाहरण देखना देश के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी देता है। उन्होंने ने बताया कि 5-6 किसानों ने मिलकर एक क्लस्टर के रूप में काम शुरू किया, जिससे लागत कम हुई और उत्पादकता बढ़ी। खेतों में एक साथ कई तरह की फसलें उगाई जा रही हैं, जिससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है और किसानों को लगातार आय होती है। बाजार से महंगे रासायनिक इनपुट्स खरीदने की निर्भरता पूरी तरह खत्म हो गई है।
और रसायन-मुक्त होने के कारण यह पद्धति भूमिगत जल, मिट्टी और इंसानी सेहत तीनों की रक्षा कर रहीं है
मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों का मुख्य फोकस ‘फार्मर्स फर्स्ट’ (Farmers First) यानी किसानों को प्राथमिकता देने पर रहा है। शोघी के किसानों की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही सरकारी नीतियों और किसानों के मजबूत इरादों से टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
यह दौरा न केवल इन प्रगतिशील किसानों की पीठ थपथपाने का माध्यम बना, बल्कि इसने हिमाचल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक संदेश दिया है कि प्राकृतिक खेती ही आने वाले समय का सुरक्षित और मुनाफेदार भविष्य है।इस मौके पर पूर्व प्रत्याशी शिमला संजय सूद, पूर्व पार्षद संजीव ठाकुर, युवा मोर्चा प्रदेश महामंत्री सुशील कदशोली, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष शिमला सुमित ठाकुर, थडी पंचायत की प्रधान आशा कश्यप, हरीश शर्मा, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष बलवंत ठाकुर अन्य कार्यकर्ता व् गाँववासी मौजूद रहे ।

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