पवन भारद्वाज चंबा तेलका
10 साल बाद भी नहीं मिला अपना भवन, अब बीकॉम विषय बंद करने से बढ़ा रोष
राजकीय महाविद्यालय तेलका के पूर्व विद्यार्थी व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पुर्व इकाई उपाध्यक्ष विकास शर्मा का कहना है चंबा जिला के दूरदराज क्षेत्र में स्थित राजकीय महाविद्यालय तेलका को लेकर प्रदेश सरकार की उदासीनता के खिलाफ विद्यार्थियों और क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है। वर्ष 2017 में स्थापित महाविद्यालय वर्ष 2026 तक भी अपने भवन से वंचित है।
महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए वर्ष 2021 में सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं तथा वन विभाग की स्वीकृति भी प्राप्त हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद आज तक भवन निर्माण के लिए बजट उपलब्ध नहीं करवाया गया। पिछले 10 वर्षों से विद्यार्थी अपने स्थायी भवन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सरकार द्वारा समय पर प्राध्यापकों के रिक्त पद न भरने के कारण विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए अन्य महाविद्यालयों का रुख करना पड़ रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस वर्ष सामने आया है, जब प्राध्यापकों की कमी के चलते राजकीय महाविद्यालय तेलका में बीकॉम विषय को बंद कर दिया गया।
विद्यार्थियों का कहना है कि पहले अध्यापकों की कमी पैदा की जाती है, जिससे विद्यार्थियों की संख्या कम हो, और उसके बाद इसी आधार पर महाविद्यालयों को कमजोर करने का प्रयास किया जाता है। कला संकाय के साथ भी भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका है।
राजकीय महाविद्यालय तेलका क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है। जम्मू सीमा से लगते क्षेत्रों के विद्यार्थी भी यहां शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस महाविद्यालय ने लगातार बेहतर परिणाम दिए हैं और यहां से पढ़े विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। महाविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
क्षेत्रवासियों से भी आग्रह है कि अधिक से अधिक विद्यार्थी अपने क्षेत्र के इसी महाविद्यालय में प्रवेश लें, ताकि इस शैक्षणिक धरोहर को मजबूत किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखा जा सके। स्थानीय लोगों की सहभागिता से ही इस महाविद्यालय को और बेहतर बनाया जा सकता है।
विद्यार्थियों और क्षेत्रवासियों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि—
– राजकीय महाविद्यालय तेलका के भवन निर्माण के लिए तुरंत बजट स्वीकृत किया जाए।ऐ
– बंद किए गए बीकॉम विषय को पुनः शुरू किया जाए।
– सभी रिक्त प्राध्यापक पदों को भरा जाए।
– महाविद्यालय को कमजोर करने वाली नीतियों पर रोक लगाई जाए।
विद्यार्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र उचित कदम नहीं उठाए तो वे अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने को मजबूर होंगे।


