राजेंद्र भट्ट को व्यक्तिगत शौर्य और सद्भाव का सम्मान

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#राजेंद्र भट्ट जी का प्रभाव के बजाय स्वभाव और कर्मयोग से ‘शून्य से शिखर’तक का सफर

(स्वतंत्र पत्रकार/लेखक)
शिमला/नाहन। भारतीय समाज में यह उक्ति सर्वविदित है कि कुछ लोग जन्म से महान होते हैं और कुछ अपनी मेहनत से महानता अर्जित करते हैं। लेकिन समाज में ऐसे विरले ही व्यक्तित्व होते हैं जो विषम परिस्थितियों को अपने धैर्य और पुरुषार्थ से मात देकर ‘शून्य से शिखर’ तक का सफर तय करते हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार के सेवानिवृत्त वित्त सचिव और विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रहे राजेंद्र भट्ट एक ऐसा ही नाम है, जिन्होंने प्रशासनिक गलियारों में अपनी ईमानदारी, विद्वत्ता और सादगी की एक अमिट छाप छोड़ी है।
हाल ही में नाहन के रॉयल पैलेस में आयोजित एक भव्य समारोह में महाराजा राजेंद्र प्रकाश फाउंडेशन द्वारा उन्हें ‘वीरता और सांप्रदायिक सद्भाव’ के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। राज परिवार के मुखिया लक्ष्यराज प्रकाश सिंह की उपस्थिति में मिला यह सम्मान दरअसल भट्ट जी के उस जीवन दर्शन को समर्पित है, जो ‘योगी से उपयोगी’ होने की सीख देता है।

#नाहन की गलियों से सचिवालय के शीर्ष तक
राजेंद्र भट्ट जी के जीवन का संघर्ष किसी प्रेरणादायी कथा से कम नहीं है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत नाहन जैसे छोटे शहर में वकालत से की थी। संघर्ष के उन दिनों में भी उनकी संवेदनशीलता ऐसी थी कि वे गरीब ग्रामीणों के केस न केवल निशुल्क लड़ते थे, बल्कि दूर-दराज से आए उन मुवक्किलों के लिए रात को ठहरने और भोजन का प्रबंध भी स्वयं करते थे। यही वह दौर था जिसने उन्हें ‘जन-सेवा’ के

#असली अर्थ समझाए।
अपनी कार्यदक्षता और कानून पर गहरी पकड़ के चलते वे जल्द ही प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बने और हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुँचे। प्रचार-प्रसार से कोसों दूर रहने वाले भट्ट जी ने हमेशा ‘कर्म प्रधान’ जीवन को प्राथमिकता दी।

#सादगी ऐसी जो मिसाल बन जाए
आज के दौर में जहाँ पद और प्रतिष्ठा मिलते ही व्यक्ति का पहनावा और व्यवहार बदल जाता है, वहीं राजेंद्र भट्ट जी ने अपनी जड़ें कभी नहीं छोड़ीं। उनसे जुड़ा एक संस्मरण आज भी लोगों के बीच चर्चा में रहता है। एक बार किसी परिचित ने उनसे शाम को शादी समारोह के लिए तैयार होकर चलने को कहा, तो भट्ट जी ने बड़ी विनम्रता से उत्तर दिया— “महोदय, मैं सुबह जो पहनकर घर से निकलता हूँ, वही रात तक चलता है।” यह छोटी सी बात उनकी उस विशिष्ट विद्वत्ता और आदर्श व्यक्तित्व की पहचान है, जो बाहरी तड़क-भड़क के बजाय आंतरिक शुचिता में विश्वास रखते हैं।

#लेखनी में राष्ट्रप्रेम और संस्कृति का संगम
प्रशासक होने के साथ-साथ राजेंद्र भट्ट जी एक प्रखर विद्वान और सृजनधर्मी लेखक भी हैं। उनकी लेखनी में जहाँ देशप्रेम और प्रकृति के प्रति गहरा लगाव दिखता है, वहीं भारतीय संस्कृति और राष्ट्रहित उनकी कविताओं का मूल आधार हैं। उनकी वाणी और लेखनी, दोनों ही समाज के लिए एक ‘उत्प्रेरक’ (Catalyst) का कार्य करती हैं। इस पुनीत कार्य में उनकी जीवनसंगिनी, श्रीमती सुनीता भट्ट भी हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहकर उनकी ऊर्जा को पुष्पित-पल्लवित कर रही हैं।
#समाज के लिए एक मार्गदर्शक
व्यक्तिगत तौर पर उनके संपर्क में आने वाले लोग जानते हैं कि वे केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक हैं। हर किसी की मदद करने की लालसा और दूसरों को आगे बढ़ाने का उनका जज्बा उन्हें असाधारण बनाता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी सक्रियता और समाज के प्रति उनकी चिंता यह दर्शाती है कि एक कर्मयोगी कभी थकता नहीं है।

महाराजा राजेंद्र प्रकाश फाउंडेशन द्वारा उन्हें मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत शौर्य और सद्भाव का सम्मान है, बल्कि यह सिरमौर के उन सभी युवाओं के लिए एक संदेश है जो मेहनत और ईमानदारी के दम पर दुनिया बदलना चाहते हैं।
> “प्रभाव व्यक्ति को कुछ समय के लिए बड़ा दिखा सकता है, लेकिन स्वभाव उसे अमर बना देता है।” राजेंद्र भट्ट जी का जीवन इसी सत्य का जीवंत प्रमाण है।
> #आवाज़ जनादेश की ओर से भट्ट जी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाईयां

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