आवाज़ जनादेश/शिमला ब्यूरो
शिमला: हिमाचल प्रदेश में भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा के बाद से ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और गुटबाजी की खबरें तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल द्वारा बुधवार को जारी की गई इस नई सूची में कई पुराने और कर्मठ कार्यकर्ताओं को जगह नहीं मिली है, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी साफ नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय पार्टी में बढ़ती गुटबाजी का नतीजा हो सकता है।
प्रमुख पदों पर हुई नियुक्तियां
नई कार्यकारिणी में विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की गई हैं, जिनकी जानकारी इस प्रकार है:
* महामंत्री: डॉ. सिकंदर कुमार, संजीव कटवाल और पायल वैद्य को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
* उपाध्यक्ष: आठ उपाध्यक्ष बनाए गए हैं, जिनमें बिहारी लाल शर्मा, रश्मि धर सूद, डॉ. राजीव भारद्वाज, विपिन सिंह परमार, पवन काजल, विनोद कुमार, राजेश ठाकुर और बलबीर वर्मा शामिल हैं।
* सचिव: आठ सचिवों की नियुक्ति हुई है – सुमित शर्मा, डॉ. संजय ठाकुर, वंदना योगी, प्रियंता शर्मा, कुसुम सदरेट, तिलकराज शर्मा, अमित ठाकुर और शिशु धर्मा।
* कोषाध्यक्ष: कमलजीत सूद को प्रदेश कोषाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है।
* कार्यालय सचिव: प्रमोद ठाकुर को कार्यालय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
मीडिया और सोशल मीडिया टीम पर भरोसा
नई कार्यकारिणी में मीडिया और सोशल मीडिया टीम पर भी विशेष ध्यान दिया गया है:
* मीडिया प्रभारी: रणधीर शर्मा को एक बार फिर मीडिया प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है।
* मुख्य प्रवक्ता: राकेश जमवाल को मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
* मीडिया संयोजक: कर्ण नंदा को मीडिया संयोजक बनाया गया है।
* सोशल मीडिया टीम: सुशील राठौर को संयोजक और कमल ठाकुर को सह संयोजक का पद दिया गया है।
* आईटी विभाग: आईटी विभाग का संयोजक अनिल डडवाल को और सह संयोजक प्रवीण ठाकुर को नियुक्त किया गया है।
पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी से नाराजगी
नई टीम में पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी ने पार्टी के भीतर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दशकों से पार्टी के लिए काम कर रहे कई वरिष्ठ कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि नए नेतृत्व ने उनके योगदान को भुला दिया है और केवल पद और सत्ता की राजनीति को प्राथमिकता दी जा रही है। एक पुराने नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह केवल एक कार्यकारिणी की बात नहीं है, यह पार्टी की विचारधारा से भटकने का संकेत है। जब जमीनी कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलेगा, तो संगठन कैसे मजबूत होगा?”
पार्टी की जमीन कमजोर होने का खतरा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर भाजपा इसी तरह से अपने पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को दरकिनार करती रही, तो आने वाले समय में पार्टी की जमीन कमजोर हो सकती है। ऐसे समय में जब कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, कार्यकर्ताओं की नाराजगी भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। एक मजबूत संगठन की नींव उसके कार्यकर्ता होते हैं, और उनकी निराशा सीधे तौर पर पार्टी के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल, प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। यह देखना बाकी है कि पार्टी इस आंतरिक असंतोष से कैसे निपटती है और क्या वह अपने नाराज कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ने की कोशिश करेगी। यह स्थिति हिमाचल प्रदेश में भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।


