आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एचआरटीसी से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के वित्तीय लाभों के भुगतान और अन्य मुद्दों को लेकर निगम को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ ने कहा कि कोर्ट में अन्य मामलों में देखा गया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभों जैसे कि पूर्व-संशोधित वेतनमान का बकाया, 1 जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान के बकाया पर भी एमडी डॉ. निपुण जवाब दाखिल करें। अदालत ने कहा कि 75 साल या उससे अधिक उम्र के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एकमुश्त बकाया राशि का भुगतान करने भी हलफनामा दायर किया जाए।
अदालत ने संशोधित वेतनमान के बकाया के भुगतान को लेकर एमडी को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं। इस हलफनामे में न केवल याचिकाकर्ताओं के बकाया राशि को भुगतान करने के बारे में बताया जाए बल्कि अन्य मामलों में भी जो मुद्दे उठाए गए हैं, उनका भी समाधान करना होगा। अदालत के आदेशों के बाद बुधवार को प्रतिवादी-निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी। कोर्ट के आदेशों के बाद डॉ. जिंदल ने कहा कि वह सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सभी शिकायतों को समाधान करने की कोशिश करेंगे।
आदेश का पालन न होने पर अफसरों पर तय होंगे आरोप
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई दी है कि अगर दस दिनों के भीतर कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे। याचिकाकर्ता कुंडला की ओर से यह दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक पूर्व फैसले का जान-बूझकर उल्लंघन किया गया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने सख्त निर्देश दिए कि यदि 21 अगस्त तक आदेश का पालन नहीं होता है तो दोनों अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देंगे कि उनके खिलाफ जानबूझकर आदेश की अवज्ञा करने के लिए आरोप क्यों न तय किए जाएं।
कोर्ट के कहने पर विशेष सचिव (ऊर्जा) शुभ करण सिंह सुनवाई के दौरान उपस्थित हुए, जबकि दूसरे अधिकारी अरविंद चौधरी उपस्थित नहीं हो सके। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में अधिकारियों को गैर अनुपालन की स्थिति में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एक तरफ महाधिवक्ता आदेश का पालन करने के लिए और समय मांग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने की प्रक्रिया में है। अदालत ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से आदेश पर कोई रोक नहीं लगती, तव तक सरकार को उसका पालन करना होगा। केवल एसएलपी दायर करने की तैयारी अवमानना कार्यवाही को स्थगित करने का आधार नहीं हो सकती।
चांजू-3 जलविद्युत परियोजना को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर
चंबा के चुराह उपमंडल की चांजू पंचायत में निर्माणाधीन 48 मेगावाट चांजू-3 जलविद्युत परियोजना को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। अदालत ने इसे लेकर सरकार सहित एचपीपीसीएल, वन विभाग और पर्यावरण विभाग सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने सभी प्रतिवादियों से 10 अक्तूबर से पहले अपने जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि क्षेत्र में चांजू नाला और मेहद नाला के संयुक्त जल का उपयोग करके भूमिगत बिजली घर में 48 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इन दोनों नालों के पानी से कुछ लोग घराट चलाते हैं, लेकिन इन दोनों नालों का पानी चांजू परियोजना के लिए मोड़ा गया है। इसकी वजह से लोगों को घराट चलाने में मुश्किल हो रही है और अगर इसकी वैज्ञानिक तौर पर जांच नहीं की जाएगी तो भविष्य में बंद भी हो सकते है।
याचिका मेंं बताया गया है कि चांजू परियोजना के लिए एचपीपीसीएल की ओर से वन अधिकार 2006 के नियमों का उल्लंघन किया गया है। वन भूमि को गैर वन भूमि में स्थानांतरण करने के लिए नियमों को ताककर पर्यावरण की मंजूरी ली गई। परियोजना को परवान चढ़ने से पहले क्षेत्र के प्रभावित लोगों के अधिकारों को संरक्षित किया जाता है। सरकार की जिम्मेवारी बनती है कि लोगों के सामुदायिक और पारंपरिक अधिकारों को राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर सुलझाया जाता है, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है। याचिका में बताया गया कि परियोजना के लिए वन भूमि को गैर वन भूमि स्थानांतरित 25 हेक्टेयर भूमि दी है जबकि पर्यावरण की ओर से केवल 18 हैक्टेयर भूमि की मंजूरी दी गई है। याचिका में अदालत से मांग की है कि या तो इन घराट वाली जमीन को भी परियोजना के लिए लिया जाए और इन्हें मुआवजा दिया जाए और नहीं तो इनके पारंपरिक अधिकारों का सरंक्षण किया जाए।


