पुरानी पेंशन की आस में भविष्य की फांस

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सरकार का यू-टर्न और युवाओं पर तलवार

राठौड़ राजेश रढाईक
प्रधान संपादक आवाज़ जनादेश (आंकलन विश्लेषण)

पुरानी पेंशन बहाली (OPS) की उम्मीद में आँखें गड़ाए बैठे कर्मचारियों के लिए यह खबर किसी बुरे सपने से कम नहीं। जिस पेंशन को वे अपने बुढ़ापे का सहारा मान रहे थे, उसकी आस में कहीं उनके वर्तमान और भविष्य की नौकरियां ही दांव पर न लग जाएं। सरकार का अचानक यू-टर्न और आउटसोर्सिंग पर जोर देने की नीति, OPS की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए एक गहरा झटका है, और साथ ही यह युवाओं के रोजगार के अवसरों पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
यह विडंबना ही है कि OPS की वकालत करने वाली सरकारें अब वित्तीय बोझ का हवाला देकर पल्ला झाड़ रही हैं। कर्मचारियों को लॉलीपॉप थमाकर वोट बटोरने की राजनीति अब युवाओं के भविष्य पर भारी पड़ने वाली है। आउटसोर्सिंग का बढ़ता चलन सरकारी नौकरियों की स्थिरता को खत्म कर देगा। नियमित भर्तियों पर तलवार लटकती रहेगी और युवा पीढ़ी संविदा और अस्थायी नौकरियों के जाल में उलझकर रह जाएगी।
OPS की मांग करने वाले कर्मचारी अपनी जगह सही हो सकते हैं। एक सुरक्षित भविष्य की चाह रखना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन सरकार के इस नए पैंतरे ने उन्हें एक मुश्किल चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। क्या वे अपनी पुरानी मांग पर अड़े रहें और देखें कि सरकार वित्तीय संकट का हवाला देकर भर्तियों को ही रोक दे? या फिर वे बदलते परिदृश्य को स्वीकार करते हुए रोजगार के नए अवसरों की तलाश करें, भले ही वे स्थायी न हों?
यह सरकार की अदूरदर्शिता और कमजोर वित्तीय प्रबंधन का भी प्रमाण है। अगर पुरानी पेंशन प्रणाली इतनी ही भारी पड़ने वाली थी, तो इसे पहले ही क्यों लागू किया गया? और अगर अब इसे वापस लेना ही है, तो युवाओं के रोजगार के भविष्य को दांव पर क्यों लगाया जा रहा है? आउटसोर्सिंग निश्चित रूप से सरकार के लिए लागत कम करने का एक तात्कालिक उपाय हो सकता है, लेकिन यह दीर्घकालिक रूप से कर्मचारियों के मनोबल, कार्य कुशलता और अंततः सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
युवा पीढ़ी, जो रोजगार की तलाश में है, इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होगी। स्थायी सरकारी नौकरियों की उम्मीद अब धुंधली होती जा रही है। उन्हें अनिश्चित भविष्य और कम वेतन वाली आउटसोर्स नौकरियों को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। यह न केवल उनके सपनों को चकनाचूर करेगा, बल्कि देश के विकास की गति को भी धीमा कर देगा।
सरकार को इस नीति पर पुनर्विचार करना होगा। वित्तीय स्थिरता और युवाओं के भविष्य के बीच एक संतुलन बनाना होगा। आउटसोर्सिंग को अंधाधुंध बढ़ावा देने के बजाय, नियमित और स्थायी भर्तियों को प्रोत्साहित करने के तरीके खोजने होंगे। OPS के मुद्दे पर सभी हितधारकों के साथ बैठकर एक व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान निकालना होगा, जो न केवल कर्मचारियों के हितों की रक्षा करे बल्कि युवाओं के भविष्य को भी सुरक्षित करे। पुरानी पेंशन की आस में भविष्य की आस को खत्म करना किसी भी सरकार के लिए एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

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