आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना (पीएमजीएसवाई) में जीआई मैपिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। राज्य में पीडब्ल्यूडी ने सडक़ विहीन जिन गांवों की सूची तैयार की थी, उसे केंद्र सरकार के हवाले कर दिया गया है। ग्राम सडक़ सर्वे ऐप पर इस सूची के अपलोड होने के बाद अब केंद्र स्तर पर टेंडर प्रक्रिया का दूसरा दौर शुरू हो गया है। इसके साथ ही हिमाचल को बड़ा बजट मिलने की संभावना बढ़ गई है। पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह पहले ही इस खुलासा कर चुके हैं। हिमाचल में पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में राज्य के हिस्से न सिर्फ नई सडक़ों का निर्माण आने वाला है, बल्कि पहले से बन चुकी सडक़ों के रखरखाव को भी बजट मिलने की संभावना है। इस सिलसिले में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी दिल्ली में ग्रामीण विकास मंत्रालय की मीटिंग में लगातार हिस्सा ले रहे हैं, जबकि उत्तर भारत के प्रशिक्षण कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर में आयोजित सेमिनार में प्रशिक्षण भी ले चुके हैं। गौरतलब है कि जीआई मैपिंग के साथ ही पीएमजीएसवाई पर नेशनल रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट एजेंसी (एनआरआईडीए) ने नए निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में पीडब्ल्यूडी को सडक़ों की मांग, गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी और काम खत्म होने पर उनके फोटो केंद्र सरकार को वेबसाइट के माध्यम से भेजने होंगे।
केंद्र सरकार के अधिकारी दिल्ली में बैठकर हिमाचल के किसी भी दूरदराज के इलाके में तैयार होने वाली सडक़ की निगरानी कर पाएंगे। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों से अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी के आधार पर सडक़ें बांटने की भी बात कही है। पीडब्ल्यूडी आबादी के इन आंकड़ों को ऑनलाइन मैनेजमेंट मॉनिटरिंग एंड अकाउंटिंग सिस्टम (ओमास) पर अपलोड कर रहा है। अब घनी आबादी वाले क्षेत्र ब्लॉक स्तर पर ग्राम सडक़ सर्वे ऐप पर दिखाई देने शुरू हो गए हैं। एनआरआईडीए ने यह आदेश फरवरी के शुरुआती दिनों में जारी किए थे। पीडब्ल्यूडी में उन्हीं अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिन्होंने पीएमजीएसवाई के तीसरे चरण में परियोजना हासिल करने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में संभावना है कि पहले ही दौर में राज्य के हिस्से 800 से 1200 किलोमीटर लंबी सडक़ें आ सकती हैं। पीएमजीएसवाई की यह परियोजना पांच साल के लिए है और इन पांच सालों में राज्य के तमाम पहाड़ी इलाके सडक़ से जुड़ जाएंगे।
पीडब्ल्यूडी ने पूरा किया होमवर्क
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता एनपी सिंह का कहना है कि पीएमजीएसवाई पर विभाग ने होमवर्क पूरा कर लिया है। केंद्र को वो तमाम जानकारियां मुहैया करवा दी गई हैं, जिनकी मांग की जा रही थी। हिमाचल के हिस्से 800 से 1200 किलोमीटर लंबी सडक़ों के लिए बजट आने की संभावना है। पीएमजीएसवाई के चौथे चरण से राज्य में उन क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जो अब तक सडक़ से दूर थे। इन क्षेत्रों की बड़ी आबादी पहली बार सडक़ से जुड़ेगी। इसके अलावा पीएमजीएसवाई के पहले और दूसरे चरण में निर्मित वे सडक़ें, जो अब खस्ताहाल हो चुकी हैं, उनके लिए भी बजट का प्रावधान इस बार हो सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र से मंजूरी मिलते ही पीडब्ल्यूडी इस योजना पर काम शुरू कर देगा।


