हाईकोर्ट ने कहा- स्थानांतरण वाले कार्यालय आदेश के खिलाफ कोई भी दायर कर सकता है याचिका

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश सरकार के स्थानांतरण वाले कार्यालय आदेश के खिलाफ प्रभावित व्यक्ति सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की अदालत ने कहा कि अगर कोई स्थानांतरण नीति के खिलाफ चुनौती देना चाहता है तो इस सवाल को अदालत ने खुला छोड़ा है। अदालत ने मुख्य याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता का सेवाकाल केवल 6 महीने का है, इसलिए अदालत को इस मामले में कोई ऐसा विशेष कारण नहीं लग रहा, जिसकी वजह से याचिका को अनुमति दी जाए।

याचिकाकर्ता नाहन डिवीजन में वरिष्ठ सहायक के रूप में कार्यरत हैं। याचिकाकर्ता 8 साल से लगातार सिरमौर में अपनी सेवाएं दे रहे थे। पदोन्नति मिलने के बाद इनका तबादला शिमला किया गया। शिमला में मात्र डेढ़ महीने के कार्यकाल के बाद सिरमौर भेजा गया। अब छह महीने से सिरमौर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विभाग ने इसका स्थानांतरण 21 फरवरी को नाहन से संगड़ाह कर दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने प्रदेश सरकार की ओर से जारी 13 फरवरी 2025 के कार्यालय आदेश के पैरा 22ए को भी चुनौती दी थी। इसमें कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मचारी सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से पहले विभाग के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज करवाएं। इस पर अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार के तहत कोई भी प्रभावित आ सकता है।

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