सरकारी स्कूलों में घटी बच्चों की संख्या, इस साल 54 हजार कम दाखिले, रिपोर्ट में खुलासा

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आवाज़ जनादेश/न्यूज़ ब्यूरो शिमला

हिमाचल में शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार के सरकारी दावों के बीच सरकारी स्कूलों में हर साल दाखिलों में गिरावट जारी है। राज्य के सरकारी स्कूलों में पिछले साल के मुकाबले 54 हजार कम दाखिले हुए हैं। प्री प्राइमरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के दाखिलों की यू डाइस प्लस रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। शैक्षणिक सत्र 2023-24 में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का नामांकन 4.80 लाख था। इस बार 54 हजार घटकर नामांकन 4.26 लाख पहुंच गया है। प्री प्राइमरी में 71 हजार, पहली से पांचवीं तक 2.36, छठी से आठवीं कक्षा तक 1.90 लाख दाखिले हुए हैं।

अधिकारियों का तर्क, बर्थ रेट में कमी से घटे दाखिले

शैक्षणिक सत्र 2024-25 को लेकर जारी हुई यू डाइस प्लस की रिपोर्ट में पाई गई कमियों को अगले वर्ष में किस प्रकार से दूर किया जाए, इसको लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मंथन शुरू कर दिया है। छह जनवरी को शिक्षा सचिव राकेश कंवर की अध्यक्षता में जिला उप निदेशकों की बैठक रखी गई है। इसमें नए शैक्षणिक सत्र में दाखिले बढ़ाने के लिए योजना बनाई जाएगी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और समग्र शिक्षा परियोजना निदेशालय भी रिपोर्ट के आधार पर आगामी दिनों में लिए जाने वाले फैसलों का प्रस्ताव बनाने में जुट गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्री प्राइमरी कक्षाओं में अभी 71,737, पहली कक्षा में 22,139, दूसरी में 47,350, तीसरी में 54,331, चौथी में 57,091, पांचवीं में 54,410, छठी में 61,733, सातवीं में 64,732 और आठवीं कक्षा में 64,105 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन कम होने का बड़ा कारण निजी स्कूलों में शिफ्ट होना नहीं है। कुछ विद्यार्थी जरूर निजी स्कूलों में गए होंगे लेकिन बर्थ रेट में कमी आने के चलते भी स्कूलों में दाखिले कम हो रहे हैं।

शिक्षा क्षेत्र में नए साल से दिखेंगे कई बड़े बदलाव

सरकारी विद्यालयों में वर्ष 2023 की तुलना में 54 हजार दाखिले कम हुए हैं। सरकार को शून्य नामांकन अथवा पांच से कम नामांकन वाले स्कूल बंद करने पड़े हैं। शिक्षकों के साल भर होने वाले तबादलों पर रोक लगाई है। शिक्षकों के रिक्त पद भरा जा रहे हैं। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए नवाचार और नवोन्मेष की जरूरत है। सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र से स्कूलों को लेकर कई बदलाव करने का फैसला लिया है।

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