वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ेंगी ग्राम पंचायतें, उच्च अधिकारियों से होगा सीधा संवाद

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

हिमाचल प्रदेश की सभी पंचायतें अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ेंगी। इसका फायदा यह होगा कि पंचायत भवन से लोग अधिकारियों से सीधा संवाद कर सकेंगे। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री से किसी भी कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात हो सकेगी। योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश की 1500 पंचायतों के लिए डेढ़-डेढ़ लाख जारी हुए हैं। राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम पंचायतों को वेब कैम, डेस्कटॉप, मॉनिटर, प्रोजेक्टर, माइक्रोफ़ोन, स्पीकर या हेडफोन और इंटरनेट कनेक्शन सहित अन्य उपकरणों की आपूर्ति करेगा। निगम ने उपकरणों की आपूर्ति और सिस्टम लगाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा शुरू होने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण लोगों के लिए डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विभागों की योजनाओं की जानकारी डिजिटल माध्यम से मिलेगी। नवीन तकनीकी आधारित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा इंटरनेट आधारित होने के कारण सीधे मोबाइल के माध्यम से किसी भी स्थान अथवा किसी भी व्यक्ति से सीधे संपर्क करने में सक्षम है। यह सुविधा शुरू होने से पंचायतों और जिला उपायुक्तों के बीच प्रभावी संचार सुविधा सुनिश्चित होगी।

पंचायतीराज विभाग के सचिव राजेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश में पंचायत स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध करवाने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम पंचायतों को उपकरण उपलब्ध करवाएगा।ग्राम पंचायतों के परिसर में कॉमन सर्विस सेंटर भी खोले जा रहे हैं। पहले चरण में 669 पंचायतों में कॉमन सर्विस सेंटर शिफ्ट कर दिए गए हैं। जगह की उपलब्धता के साथ अन्य पंचायतों में भी यह सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। पंचायत भवनों के परिसर से संचालित होने वाले कॉमन सर्विस सेंटरों के कारण लोगों को कोई भी प्रमाण पत्र या दस्तावेज प्राप्त करने में कोई असुविधा नहीं होगी। कॉमन सर्विस सेंटरों का संचालन स्थानीय पंचायतों के लोगों द्वारा किया जाएगा।

प्रदेश की 1500 पंचायतों में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा शुरू करने के लिए प्रत्येक पंचायत को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये जारी हुए हैं। सुविधा शुरू होने के बाद पंचायत घरों से लोग प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अधिकारियों से सीधा संवाद कर सकेंगे। पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने में यह सुविधा महत्वपूर्ण साबित होगी।

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