आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर परवाणू में बहुमूल्य जमीन को हिमुडा की ओर से कंपनी को पट्टे पर आवंटित करने का करार निरस्त कर दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने हिमुडा को कंपनी के पैसे वापस करने के आदेश देते हुए भूमि को अपने कब्जे में लेने को कहा। अदालत ने पाया कि हिमुडा के अधिकारी अपनी मर्जी से जमीन का आवंटन नहीं कर सकते। हिमुडा ने परवाणू के सेक्टर एक में 8.99 वर्ग मीटर के अतिरिक्त प्लॉट को एक कंपनी को 33 साल के लिए 80 लाख रुपये के किराए पर दिया था। बाद में इसे कंपनी को 99 साल के लिए पट्टे पर आवंटित कर दिया।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि हिमुडा ने नियमों का उल्लंघन करते हुए निजी कंपनी को इस भूमि का आवंटन किया है। जिस जमीन को कंपनी को दिया गया है वह एक रेजिडेंशियल एरिया है। वहां पर किसी भी तरह का उद्योग नहीं लगाया जा सकता। वह एक ग्रीन एरिया भी है। हिमुडा की ओर से दलील दी गई कि साथ में लगती भूमि को केवल इच्छुक व्यक्ति द्वारा दायर आवेदन पर सार्वजनिक नोटिस जारी किए बिना पहले आओ पहले पाओ के आधार पर साथ वाले प्लॉट मालिक को दिया जाता है। अदालत ने पाया कि जिस कंपनी को भूमि दी गई है उसकी आसपास कहीं भी जमीन नहीं है। हिमुडा को इस जमीन पर वापस कब्जा करने के निर्देश दिए हैं।


