आवाज़ जनादेश ब्यूरो
शिमला। प्रदेश की पांच हजार करोड़ की आर्थिकी संभालने प्रदेश वाले आठ जिलों को सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। यहां इस बार कोरोना महामनारी से लेकर तमाम विपरित परिस्थितयों में भी सरकार ने सेब का समर्थन मूल्य केवल पचास पैसे बढ़ाया
इस बड़ा तोफा प्रदेश सरकार प्रदेश के बागवानों को क्या दे सकती थी यह शब्द प्रदेश के बागवानों के है जिन्होंने सरकार के आग्रह पर मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए करोड़ो दान किए है |समर्थन मूल्य बढ़ाना प्रदेश के लाखों बागवानों के साथ भद्दा मजाक है। यह बात शिमला में विभन्न बागवानी संगठनो के प्रिनिधियों ने कही जिनमे सरकार के इस फैसले को ले कर खासी नाराजगी व आक्रोश है।
शिमला से बागवान विकास एवं संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेश चौहान,फल उत्पादन संघ के अध्यक्ष रविन्द्र चौहान,किसान बागवान कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश नेग्टा,पर्यावरण संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष राजेन्द्र वेक्टा महा सचिव शिव प्रताप भीमटा,सहसचिव विजय चौहान,मेहर सिंह चौहान,दौलतराम बक्सेट,चुनी लाला शर्मा,दिनेश मेहता,विनोद मेहता,सुशील चौहान,जगदीश शर्मा संतोष भिक्टा,अतर सिंह रढाईक,श्याम शर्मा,भगत राम शर्मा,प्रेम भारमैक,ग्राम पंचायत के प्रधान,दलीप जस्टा,हरपाल चौहान,राजीव शर्मा,अम्बिका चौहान,पुर्व प्रधान सुशील चौहान,देवेन्द्र चौहान, मन महोन चौहान,प्रकाश चंद विजय कुमार, ज्ञान ठाकुर बागवान महेन्द्र,सुनील चौहान, सुमन चंद,नरेन्द्र चौहान, प्रभुदयाल, निरज चौहान,नरेश चौहान,सुरेन्द्र चौहान,प्रदीप चौहान,सुरेश,पंकज चौहान,रमेश,सतीश कुमार और चंद्र मोहन के साथ-साथ सभी बागवानों की तरफ से जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में सरकार से इस निर्णय को बदल पंद्रह रूफए संर्थन मूल्य करने की मांग की है।
बागवानों का कहना है कि आज जहाँप्रदेश में किसानो के लिए फैड्रेश्ने बनाई है लेकिन वो सिर्फ राजनीतिक अखडा बन कर रह गई है ये फैड्रेश्ने सिर्फ सरकार के चेह्तो को कुर्सियां प्रदान करने के लिए है जबकि इन सभी फैडरेशन के पास भारत के हर मुख्य शहरों में अपनी दुकाने है जो बर्षो से धुल फांक रही है |दूसरी तरफ फसल बीमा योजना के अंतर्गत बागवानों से बैंको ने करोड़ो की चपत लगा ली है नुकासन का कोई भी लाभ बागवानों को नही मिला है |आज देश का हर नागरिक और किसान- बागवान कोरोना महामारी के कारण बेरोजगारी व आर्थिकी सकंट से बुरी तरह जूझ रहा है।
हिमाचल सेब सीजन शुरू होते ही प्रदेश का बागवान महंगाई के दौर में पेटी,ट्रे,सेब पैकिंग सामग्री,पेट्रोल-डीज़ल व अन्य सामान के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इधर सरकार ने पचास पैसे सेब का समर्थन मूल्य बढ़ाकर पांच हजार करोड के सेब उद्योग से जुडे आठ जिलो के लाखों परिवार को तोहफा दिया हैं। साथ ही इस बार कुदरत के कहर के कारण अधिकतर स्थानों पर ओलों ने भारी नुकसान हुआ है उसकी कोई भी भरपाई नही की गई ।
एक तरफ जहाँ इस साल सेब की फसल भी उम्मीद से बहुत कम है। वहीं सरकार ने अभी तक पिछली साल के समर्थन मूल्य के पैसे की अदायगी तक नहीं की है। आढ़तियों को to लुट की खुली छुट दे रखी है पिछली साल का पैसा अभी तक बागवानों को नहीं मिला है। अधिकतर आढती सिन के बिच हि गयाब होते है जिनको खोजना बहुत ही बहुत मुश्किल हो जाता है| बागवानों का पर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है दूसरी तरफ बैंको से बागवानों की कमर तोड़ कर रखी है बिमा का पैसा काटा जाता है लेकिन क्लेम नही मिलाता ।यही किसान कृषि ऋण की ब्याज लौटने में बागवान फसल न लगने के कारण असमर्थ हो जाए तो उसे शरेआम समाज के बिच में प्रताड़ित किया जाता है जिससे कुद्कुशी जैसे हलात पैदा हो जाते है |
इन संस्थाओ के प्रतिनिधियों व् प्रोग्रसिव बागवानों का कहना है कि जब कि सरकार में मंत्री,विधायक व स्वयं सरकार के मुख्या सेब बहुल क्षेत्र से बागवान है। जोकि बागवानों की हर परिस्थितियों व समस्याएं से अवगत होने के बावजूद भी अनदेखी व भद्दा मजाक कर बागवानों के जख्मो में नमक छिडकाने का कार्य करे जो कि बहुत ही दुखद व चिन्ता जनक है। सरकार के इस भद्दे मजाक से पूरे सेब बागवानी क्षेत्रों के बागवानों,पंचायत प्रतिनिधियों,सेब से सम्बंधित संगठनों व अन्य संगठनों में आक्रोश व नाराजगी है। सभी संगठनो व बागवानों ने सरकार से इस निर्णय को तात्काल बदल कर पूर्ण विचार करके सेब का समर्थन मूल्य 15 रूपए करने की मांग की है नही तो प्रदेश के बागवानों को आंदोलन के लिए मजबूर न करे सरकार |
सरकार का बागवानों से भद्दा मजाक बर्दाश्त नही – बागवानी संगठन
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