अरुण शर्मा ने कहा कि निजी स्कूल शिक्षा की दुकान बन गए हैं बेहद दुखद है । स्कूली प्रोस्पेक्ट्स , व आई कार्ड से लेकर वर्दी , किताबें , मैसेज, पिकनिक और बस्ते हर चीज में कमीशन का धंधा फल फूल रहा है, अभिभावक खुद को स्कूल प्रशासन के आगे असहाय पा रहा है ।
जिला कॉंग्रेस कमेटी शिमला शहरी अध्यक्ष अरुण शर्मा ने प्रशासन व सरकार पर निजी स्कूलों से साँठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन कि ढुलमुल रवैये के कारण ही निजी शिक्षण संस्थान आज बेलागाम हो रहें है , यदि सरकार चुस्तदरुस्त हो तो नियम कानून का पालन करवाया जा सकता है परंतु भाजपा सरकार का अधिकारियों पर बस नही चलता न ही प्रशासन का सही उपयोग सरकार कर पा रही है ,जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा निजी स्कूलों दावरा लूटा जा रहा है परंतु सरकार की कान पर जूं तक नही रेंग रही है ।
अरुण शर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश के अंदर निजी स्कूलों की मनमानी चरम पर है परंतु प्रशासन गहरी नींद में सोया है जिस कारण अभिभावक खुलेआम लूट का शिकार हो रहें है ।
अरुण शर्मा ने कहा कि सरकार जल्द से जल्द एक नियामक आयोग का घठन करे जिसके द्वारा निजी स्कूलों की लूट पर लगाम लगाई जा सके ।
अरुण शर्मा ने कहा की मुनाफ़ा कमाना शिक्षण संस्थानों का औचितय नही होना चाहिए परंतु आज निजी स्कूलों में कुछ दलालों की वजह से सारा माहौल खराब हो रहा है शिक्षा को कारोबार समझने वाले चंद लोगो की सोच की वजह से सारा सिस्टम गड़बड़ा रहा है , निजी स्कूलों की इस सोच पर शिकंजा कसना जरूरी है, यदि समय रहते प्रशासन न जागा तो सतिथि और भी ज्यादा खराब हो सकती है ।
अरुण शर्मा ने कहा की जनता की मूलभूत सुविधाओं मे से एक मुद्दा शिक्षा भी है यदि जनता से खुले आम हो रही लूट पर सरकार आंखे मूँद बैठी है तो इसका क्या कारण हो सकता है ? पारदर्शी सरकार का वादा कर सत्ता में आने वाले भाजपा के मुख्यमंत्री जवाब दें आखिर निजी स्कूलों की खुलेआम लूट पर वह चुप क्यूँ है ? सरकार व प्रशासन द्वारा कौन सी बड़ी कार्यवाही अब तक अमल में लाई गई है ? निजी स्कूलों द्वारा लिए जा रहे अतिरिक्त शुल्क पर सरकार का क्या पक्ष है ? जनता द्वारा उठाए जा रहे प्रशनों पर मंत्री मौन क्यूँ हैं ?
अरुण शर्मा ने कहा की वर्तमान शिक्षा मंत्री माननीय भारद्वाज जो की शिमला के विधायक भी हैं व जी उन्हे शहर की जनता की भावनाओं को देखते हुए जल्द से जल्द कार्यवाही कर जनता को राहत दिलवानी चाहिए ।
अरुण शर्मा ने कहा की सरकार जल्द से जल्द नियामक आयोग का घठन करें व निजी स्कूलों पर नकेल कसें जनता को राहत प्रदान करे अन्यथा कांग्रेस निजी स्कूलों के खिलाफ व्यापक आंदोलन खड़ा करने से गुरेज नही करेगी ।
बयान

हिमाचल निजी स्कुल वेल्ल्फैर समिति के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा है की प्रदेश में दो तरह के स्कुल है एक CBSC दुसरे NCRT बोर्ड से मान्यता प्राप्त परन्तु दुर्भाग्य यह है की राजनीतक फायदों के लिए शिक्षा पर राजनीती हो रही है सरकार भी छोटे स्कूलों को एवं बड़े स्कूलों को एक दृष्ठि से देख रहे है उपर से मिडिया भी इसी रहा पर है | कुछ संगठनो के पास शायद कोई और मुद्दे नही है लोगो का ध्यान किस और बनटे यही प्रयास है | जो लोग सडको पर व्यान बजिया कर रहे है उनमेसे नाम मात्र ऐसे लोगो है जो अभिभावकों मेंसे है |नारे शिमला में लगते है गाज छोटे स्कूलों पर गिरती है प्रदेश के ग्रामीण स्कूलों की फ़ीस 15 से 20 हजार वार्षिक है जिसमे किताबे बर्दिया सब आता है | शर्मा ने कहा है की राजनीतक फायदे के लिए सभी स्कूलों को निशाना न बनाए यदि अभी अभिभावक चाहे तो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में शिक्षा दे जरुरी नही सडको पर नारे लगाए सरकारी स्कूलों को सुधरने के लिए प्रयास करने चाहिए न की शिक्षा को बदनाम करने के लिए |



