राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिषद की महत्वपूर्ण बैठक से स्वास्थ्य मंत्री की अनुपस्थिति प्रदेश सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है : डॉ. राजीव सैजल

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केंद्र पर धन न देने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस सरकार स्वयं महत्वपूर्ण बैठकों से रहती है गायब : डॉ. राजीव सैजल

शिमला। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने केंद्र सरकार द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (Central Council of Health & Family Welfare) की 16वीं बैठक में हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की अनुपस्थिति और स्वास्थ्य सचिव के बीच बैठक छोड़कर चले जाने पर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं।

डॉ. सैजल ने कहा कि यह परिषद देश में स्वास्थ्य नीति निर्धारण का सर्वोच्च मंच है, जहां सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेते हैं। इस बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों, केंद्र प्रायोजित योजनाओं, स्वास्थ्य क्षेत्र के सुधारों तथा राज्यों को मिलने वाली विभिन्न परियोजनाओं एवं वित्तीय सहायता पर व्यापक चर्चा होती है। ऐसे महत्वपूर्ण मंच पर हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का अनुपस्थित रहना और स्वास्थ्य सचिव का बैठक बीच में छोड़कर चले जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बार-बार यह आरोप लगाती है कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं करा रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश सरकार स्वयं उन महत्वपूर्ण बैठकों में गंभीरता नहीं दिखाती, जहां राज्यों की आवश्यकताओं, स्वास्थ्य परियोजनाओं और वित्तीय सहयोग पर चर्चा होती है। यदि प्रदेश सरकार अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से रखेगी ही नहीं, तो प्रदेश के हितों की पैरवी कौन करेगा?

डॉ. सैजल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेष सहायता, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, नए संस्थान, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता तथा केंद्र प्रायोजित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री का इस बैठक में अनुपस्थित रहना प्रदेश के हितों की अनदेखी है।

उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर नहीं है। केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और राजनीतिक बयानबाजी से स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत नहीं होती, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में सक्रिय भागीदारी और प्रभावी पैरवी से प्रदेश को अधिक लाभ मिल सकता है।

डॉ. सैजल ने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि स्वास्थ्य मंत्री इस महत्वपूर्ण बैठक में क्यों शामिल नहीं हुए तथा स्वास्थ्य सचिव ने बैठक बीच में क्यों छोड़ी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि क्या प्रदेश सरकार के लिए राज्य के स्वास्थ्य हितों की रक्षा प्राथमिकता है या नहीं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को केंद्र पर निराधार आरोप लगाने के बजाय राष्ट्रीय मंचों पर गंभीरता के साथ भाग लेना चाहिए, ताकि हिमाचल प्रदेश को स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक से अधिक योजनाओं, संसाधनों और वित्तीय सहयोग का लाभ मिल सके।

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