आज मिड डे मील वर्करों की हड़ताल का धर्मपुर औऱ गोपालपुर में व्यापक असर

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सीटू प्रधान भूपेंद्र के नेतृत्व में शिमला रैली में सैंकड़ो ने लिया भाग
धर्मपुर (मंडी)
मिड डे मील वर्करज की राज्यव्यापी हड़ताल का आज धर्मपुर और गोपालपुर में व्यापक असर रहा जिसमें वरकरों ने अपनी मांगों के लिए स्कूलों में खाना नहीं बनाया और विभाग को मजबूरी में खाना बनाने की वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।सैंकड़ो हड़ताली वरकरों ने सीटू ज़िला प्रधान भूपेंद्र सिंह यूनियन की ज़िला प्रधान बिमला देवी ,निशा देवी, प्रमिला देवी गोपालपुर,चिंत राम और सत्या देवी मण्डप-धर्मपुर और सत्या देवी सिद्धपुर औऱ रजनी देवी संधोल के नेतृत्व में शिमल रैली मे भाग लिया।भूपेंद्र सिंह ने कहा की सरकार मिड डे मील वरकरों को साल में बारह महीने के बजाए दस महीनों का ही मानदेय देती है जबकि इसके लिए हिमाचल हाईकोर्ट ने वरकरों को 12 महिनों का मानदेय देने का निर्णय सुनाया है लेकिन हिमाचल सरकार इसके खीलाफ़ सुप्रीमकोर्ट चली गई है जो उसका मिड डे मील विरोधी फ़ैसला है।इसलिए अब यूनियन भी सुप्रीम कोर्ट जा रही है ताकि वरकरों को न्याय मिल सके।इसके अलावा इन्हें किसी भी प्रकार की आकस्मिक, मैडीकल व अन्य छुट्टियां नहीं दी जाती है और किसी कारणवश छूटी लेनी पड़े तो उन्हें उस दिन खाना बनाने के लिए दिहाड़ी पर किसी कुक को स्कूल भेजने का इंतजाम करना पड़ता है।कई बार तो वर्करज को स्वयं के बीमार होने या दुर्घटनाग्रस्त होने पर भी अवकाश नहीं मिलता है जो श्रम क़ानूनों के विपरीत है।वरकरों को जो ऑनलाईन मानदेय अदायगी की जाती है उसकी पूर्ण जानकारी उन्हें नहीं मिल पाती है कियूंकि उन्हें केंद्र व राज्य सरकार से अलग अलग और दो या तीन महीने बाद पेमेंट बैंक में आती है।इसलिए यूनियन वरकरों को पे स्लीप देने की मांग कर रही है।यूनियन की ये भी मांग है कि प्रत्येक स्कूल में न्यूनतम तो वर्कर होने चाहिए और 25 बच्चों के आधार पर इनकी छँटनी करने की प्रक्रिया रुकनी चाहिये।यूनियन का मानना है कि यदि स्कूलों में दो दो वर्कर होंगे तो उनमें से किसी एक के अवकाश पर रहने पर दूसरा खाना बना सकता है।यूनियन की मांग पर हिमाचल सरकार ने स्कूलों के मर्ज होने पर उन्हें दूसरे स्कूलों में एडजस्ट तो किया जा रहा है लेकिन उन्हें डेढ़ हज़ार रुपये कम वेतन दिया जा रहा है जो सभी को एकसमान मिलना चाहिए।मिड डे मील योजना मूल रूप में केंद्र सरकार की है लेकिन बड़ी हैरानी की बात है कि जब से केंद्र में मोदी के नेतृत्व में मोदी सरकार बनी है तब से मिड डे मील वरकरों के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है जबकि जो भी बृद्धि हुई है वो राज्य सरकार द्धारा की गई है।स्कूलों में पच्चीस बच्चों की शर्त के आधार पर छँटनी भी केंद्र सरकार की नीति के अनुसार हो रही है और इन्हें न्यूनतम वेतन नहीं दिया जाता है। यूनियन राज्य कमेटी ने प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को माँगपत्र सौंपा और मांगो बारे विस्तृत चर्चा की और जल्दी सभी मांगो को पूरा करने की मांग उठाई।

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