स्याठी व हियूंण के बेघर परिवारों को अब तक नहीं मिली जमीन, किसान सभा ने एसडीएम से लगाई गुहार

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धर्मपुर(मंडी)
गत वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से बेघर हुए स्याठी और हियूंण-बाल्ह के परिवारों की समस्याओं को लेकर किसान सभा का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को नेता भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में एसडीएम धर्मपुर से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष प्रभावित परिवारों की समस्याएं रखते हुए उन्हें शीघ्र राहत प्रदान करने की मांग उठाई।

किसान सभा नेता भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष बरसात के दौरान लौंगिणी पंचायत के स्याठी गांव में भारी भू-स्खलन के कारण दो दर्जन के करीब परिवार बेघर हो गए थे। घटना को लगभग एक वर्ष होने वाला है, लेकिन प्रभावित परिवारों को आज तक मकान निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करवाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इन परिवारों को केवल तीन माह का किराया दिया है, जबकि वे पिछले एक वर्ष से किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार तनियार पंचायत के हियूंण-बाल्ह क्षेत्र के करीब एक दर्जन परिवार पिछले तीन वर्षों से किराये के मकानों में रह रहे हैं। इन परिवारों को भी अभी तक स्थायी पुनर्वास के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करवाई गई है और मात्र छह माह का किराया ही दिया गया है।

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि स्याठी गांव के कृष्ण, अशोक, ललित, रूमा, शनीचरू, संतोष, रवि, धनीराम, दीप कुमार, विशाल, गर्दीता राम, डुमनु, कर्मदास, ब्रह्मदास, देशराज, हल्कू, संजय, जय सिंह, रजनीश और रवि कुमार सहित 20 परिवार लंबे समय से राहत और पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भी प्रभावित परिवार किराये की राशि के बारे में प्रशासन से पूछते हैं तो सरकार से धनराशि जारी न होने का हवाला देकर मामला टाल दिया जाता है। वहीं स्थानीय विधायक भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि कई प्रभावित परिवारों को पशुधन और गौशालाओं के नुकसान का मुआवजा भी आज तक नहीं मिला है। दीप कुमार, कर्मदास और शनीचरू की 16 खच्चरों, धनीराम की 10 बकरियों, मिलखी राम की भैंस और बकरी, देशराज की चार भेड़ों, गर्दीता राम के बैलों व गौशाला तथा दीप कुमार की गाय के नुकसान का अभी तक उचित मुआवजा नहीं दिया गया है।

किसान सभा ने प्रशासन से मांग की कि सभी प्रभावित परिवारों को शीघ्र मकान निर्माण के लिए भूमि और वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। साथ ही जिन परिवारों को राहत सूची में शामिल नहीं किया गया है, उन्हें भी पात्र मानकर सहायता उपलब्ध करवाई जाए।

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासन उन परिवारों को भी सहायता देने से इंकार कर रहा है जिनके मकान पूरी तरह ढहे नहीं हैं, लेकिन वे गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त और रहने योग्य नहीं रह गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी जर्जर और असुरक्षित इमारतों में कोई परिवार कैसे रह सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर मानवीय समस्या पर प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों मौन बने हुए हैं।

किसान सभा ने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आगामी दिनों में व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होगा। वहीं एसडीएम धर्मपुर ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को सुनकर मामले को सरकार के समक्ष उठाने और नियमानुसार उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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