गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज शिमला में ‘डिकोडिंग इनबॉर्न टैलेंट्स थ्रू DMIT’ पर कार्यशाला का सफल आयोजन

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शिमला: गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज, शिमला में 25 अगस्त, 2025 को “डिकोडिंग इनबॉर्न टैलेंट्स थ्रू डर्माटोग्लाइफिक्स मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट (DMIT)” पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अभिनव सत्र का उद्देश्य छात्रों को उनकी जन्मजात प्रतिभाओं और बहु-आयामी बुद्धिमत्ता को समझने में मदद करना था।
कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अशु गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री की विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम महाजन ने इसका संचालन किया। इस दौरान, सुश्री विभूति दत्ता और सुश्री मुस्कान मेहता ने छात्र समन्वयक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई।
क्या है DMIT?
कार्यशाला के मुख्य वक्ता, प्रो. (डॉ.) बी. एस. चौहान ने DMIT के वैज्ञानिक आधार को समझाया। उन्होंने बताया कि यह फिंगरप्रिंट विश्लेषण पर आधारित एक तकनीक है जो हॉवर्ड गार्डनर द्वारा परिभाषित 8 प्रकार की बुद्धिमत्ता का आकलन करती है। डॉ. चौहान के अनुसार, यह परीक्षण IQ, EQ, AQ और CQ जैसे 45 से अधिक लर्निंग पैरामीटर्स की 95% तक की सटीकता से पहचान कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों सहित दुनिया भर में 3 करोड़ से अधिक लोग यह टेस्ट करा चुके हैं।
DMIT के लाभ
डॉ. चौहान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि DMIT छात्रों को कई तरह से मदद कर सकता है:
* तनाव में कमी: यह छात्रों के तनाव को 60% तक कम कर सकता है।
* सीखने की क्षमता में सुधार: सीखने की गति में 40% तक की वृद्धि हो सकती है।
* सही करियर चुनाव: करियर निर्णय लेने की क्षमता में 70% तक सुधार होता है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा और दंत चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में, जहाँ 80% छात्र तनाव और चिंता से जूझते हैं, यह पद्धति उन्हें सही विशेषज्ञता चुनने और भावनात्मक संतुलन बनाने में सहायक हो सकती है।
इस सत्र के दौरान, छह छात्राओं—सुश्री विभूति, सुश्री अनामिका, सुश्री दीक्षा ठाकुर, सुश्री मुस्कान, सुश्री आलिशा मिर्ज़ा और सुश्री निवेदिता—के साथ-साथ डॉ. पूनम महाजन ने भी DMIT टेस्ट कराया। तकनीकी कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी सुश्री प्रिधि ठाकुर, श्री आयुष दस्ता और सुश्री तान्या पापटा ने संभाली।
भविष्य की योजनाएँ
डॉ. अशुतोष गुप्ता ने घोषणा की कि कॉलेज के सभी अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए भी जल्द ही ऐसे और सत्र आयोजित किए जाएँगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला के परिणामों को एचपीयू और तीन सहयोगी संस्थानों के सहयोग से संकलित किया जाएगा और आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (सितंबर 2025, टी. एस. नेगी गवर्नमेंट कॉलेज, रिकांगपिओ) में प्रस्तुत किया जाएगा।
कार्यशाला का समापन छात्रों और शिक्षकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ हुआ। यह पहल चिकित्सा शिक्षा में वैज्ञानिक और आधुनिक उपकरणों के समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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