
दैनिक आवाज़ जनादेश शिमला ब्यूरो
ऑकलैंड हाउस स्कूल, शिमला में कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों के लिए “इनबॉर्न टैलेंट्स को डिकोड करने हेतु डीएमआईटी (DMIT)” विषय पर एक विशेष और ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. बी. एस. चौहान थे, जो एक प्रसिद्ध नैनोटेक्नोलॉजी वैज्ञानिक और डीएमआईटी विशेषज्ञ हैं। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को डर्मेटोग्लिफिक्स मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट (DMIT) के वैज्ञानिक महत्व से परिचित कराया।
डॉ. चौहान ने बताया कि डीएमआईटी का उपयोग दुनिया के 40 से अधिक देशों में किया जा रहा है। यह किसी भी व्यक्ति की आठ प्रकार की बहु-बुद्धिमत्ता (Multiple Intelligences) तथा IQ, EQ, AQ और CQ को 95% से अधिक सटीकता के साथ माप सकता है। यह टेस्ट छात्रों को उनकी जन्मजात प्रतिभाओं और योग्यताओं को पहचानने में मदद करता है, जिससे वे सही करियर का चुनाव कर सकें।
इस कार्यशाला का आयोजन स्कूल की प्रधानाचार्या स्मारकी समंतराय के नेतृत्व में किया गया। इसमें 300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान, चार छात्रों का डीएमआईटी परीक्षण मौके पर ही किया गया और 11 अन्य छात्रों का परीक्षण अगले सप्ताह किया जाएगा। छात्रों की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए, हिमालयन राइज़ (एक MSME पंजीकृत संगठन) द्वारा 10 और छात्रों के लिए यह परीक्षण प्रायोजित किया जाएगा।
वैज्ञानिक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
डॉ. चौहान ने हॉवर्ड विश्वविद्यालय के हॉवर्ड गार्डनर (1983) के शोध का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आठ प्रकार की बुद्धिमत्ता की अवधारणा दी थी। उन्होंने बताया कि डीएमआईटी इन्हीं बुद्धिमत्ताओं को पहचान कर छात्रों को सही दिशा दिखाता है। उन्होंने यूनेस्को की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 70% छात्र गलत करियर चुनते हैं। विश्व आर्थिक मंच (2023) का अनुमान है कि आज के 65% छात्र भविष्य में ऐसी नौकरियों में काम करेंगे जो अभी मौजूद नहीं हैं। ऐसे में, डीएमआईटी भारतीय छात्रों को भविष्य के करियर जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोबोटिक्स, अंतरिक्ष अनुसंधान, जेनेटिक इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों के लिए तैयार कर सकता है।
डॉ. चौहान ने यह भी बताया कि अपनी जन्मजात प्रतिभा को जानने से छात्रों को NEET, JEE, UPSC, SSC, और SSB जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में 30–40% तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पहल
प्रधानाचार्या समंतराय ने इस पहल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बताया। उन्होंने कहा, “यह कार्यशाला हमारे युवाओं को इंडिया@2047 के लिए तैयार करती है।” उन्होंने प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के कथन का उल्लेख किया: “हर कोई प्रतिभाशाली है, लेकिन यदि आप मछली को पेड़ पर चढ़ने की क्षमता से परखेंगे, तो वह जीवनभर खुद को मूर्ख समझेगी।” उन्होंने कहा कि डीएमआईटी यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी बच्चा ऐसा महसूस न करे और अपनी सही क्षमता को पहचान सके।
इस कार्यशाला का सफल संचालन समृति चौहान, प्रतिभा सूद और मंजीला ने किया। इस कार्यक्रम में कई छात्रों ने पंजीकरण और समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिनमें तेजस्वी शर्मा, माधवी महाजन, निहारिका शर्मा, और अन्य शामिल हैं। हिमालयन राइज़ की ओर से शैरिन वर्मा, प्रिधि ठाकुर और आयुष दस्ता भी उपस्थित थे।
यह कार्यशाला छात्रों और शिक्षकों के लिए एक नया दृष्टिकोण लेकर आई है और वैज्ञानिक आधार पर करियर नियोजन और समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
ऑकलैंड हाउस स्कूल में ‘जन्मजात प्रतिभाओं को पहचानने’ पर एक परिवर्तनकारी कार्यशाला का आयोजन
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