आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
पहलगाम में हुए बर्बर और हृदयविदारक आतंकवादी हमले ने, जिसमें हमारे अनेक निर्दोष नागरिकों की जान गई और कई सुहागिनों का सिंदूर हमेशा के लिए मिट गया, पूरे देश को गहरे शोक और आक्रोश में डुबो दिया था। इस कायरतापूर्ण कृत्य का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत की तीनों सेनाओं ने जिस संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह न केवल आतंकवादियों और उनके आकाओं को एक कठोर संदेश है, बल्कि यह भारत की अटूट इच्छाशक्ति और अपनी जनता की सुरक्षा के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का भी ज्वलंत प्रमाण है। ऑपरेशन सिंदूर, अपने नाम में ही उस पीड़ा और संकल्प को समेटे हुए है, जिसका सामना देश ने किया और जिससे उबरने का दृढ़ निश्चय दिखाया।
22 अप्रैल, 2025 की काली तारीख को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने मानवता को शर्मसार कर दिया था। पच्चीस भारतीय और एक नेपाली नागरिक की निर्मम हत्या ने, जिनमें कई नवविवाहित जोड़े भी शामिल थे, हर भारतीय का दिल छलनी कर दिया था। इस जघन्य अपराध के बाद देश में गुस्से की लहर दौड़ गई थी और सरकार पर आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने का भारी दबाव था।
ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना का एक सुविचारित और समन्वित अभियान था। इसकी योजना अत्यंत गोपनीयता के साथ, सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर तैयार की गई थी। इस ऑपरेशन का प्राथमिक लक्ष्य पाकिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओके) में पल रहे उन आतंकी ढांचों को ध्वस्त करना था, जो भारत के विरुद्ध आतंकी साजिशों का केंद्र और संचालन स्थल बने हुए थे।
7 मई, 2025 की सुबह भारतीय सेना ने एक साहसिक कदम उठाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी सार्वजनिक की। कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने देश को बताया कि यह ऑपरेशन 1:05 बजे से 1:30 बजे तक, मात्र 25 मिनट की अवधि में, अत्यंत सटीकता के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान, भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित नौ चिन्हित आतंकवादी ठिकानों पर एक साथ अचूक हमले किए।
इन लक्षित ठिकानों में पाकिस्तान के बहावलपुर (जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय), मुरिदके (लश्कर-ए-तैयबा का शिविर), सियालकोट के पास मेहमोना (हिज्ब-उल-मुजाहिदीन का प्रशिक्षण शिविर), तेहरा कलां के पास सरजल (जैश-ए-मोहम्मद का शिविर) शामिल थे। वहीं, पीओके में कोटली के पास मर्कज अब्बास (जैश-ए-मोहम्मद का शिविर), कोटली के पास मर्कज राहील शाहिद (हिज्ब-उल-मुजाहिदीन का शिविर), तंगधार सेक्टर के अंदर सवाई (लश्कर-ए-तैयबा का शिविर), मुजफ्फराबाद के पास सैयदना बिलाल कैंप (जैश-ए-मोहम्मद का लॉन्चपैड) और राजौरी के विपरीत बरनाला (लश्कर-ए-तैयबा का शिविर) को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। भारतीय सेना ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य केवल आतंकवादी ठिकाने थे और पाकिस्तानी सेना या नागरिक प्रतिष्ठानों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया गया। यह कार्रवाई पूर्णतः लक्षित, सुविचारित और गैर-escalatory प्रकृति की थी।
ऑपरेशन सिंदूर का महत्व बहुआयामी है। यह न केवल पहलगाम हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह आतंकवादियों को उनके जघन्य कृत्यों का करारा जवाब भी है। ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ उन बेसहारा महिलाओं को एक भावभीनी श्रद्धांजलि है, जिन्होंने इस क्रूर हमले में अपने जीवनसाथी को खो दिया। इस ऑपरेशन ने विभिन्न आतंकी संगठनों के महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्रों और लॉन्चपैडों को नष्ट करके भारत में हमले करने की उनकी क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। यह पाकिस्तान और अन्य आतंकी समूहों को एक स्पष्ट और कठोर संदेश देता है कि भारत अपनी सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है और आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
ऑपरेशन की सफलता भारतीय खुफिया एजेंसियों की अचूक क्षमता और उनके उत्कृष्ट समन्वय का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, यह भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच अद्भुत तालमेल को भी दर्शाता है, जिसने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमारी तीनों सेनाओं की एकजुट शक्ति को प्रदर्शित किया है। भारत ने इस ऑपरेशन से पहले अपने प्रमुख सहयोगी देशों को सूचित किया था, और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान की ओर से इस ऑपरेशन पर तीखी प्रतिक्रिया अपेक्षित थी, जिसमें इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया गया है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा भारत की इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के वैध अधिकार के रूप में मान्यता दे रहा है।ऑपरेशन सिंदूर भारत द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध उठाया गया एक साहसिक और निर्णायक कदम है। यह न केवल पहलगाम के पीड़ितों को न्याय दिलाता है, बल्कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को भी यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अब मूक दर्शक बनकर नहीं रहेगा। यह ऑपरेशन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय और निर्णायक कार्रवाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। ऑपरेशन सिंदूर भारत की तीनों सेनाओं के शौर्य, समन्वय और अटूट संकल्प का प्रतीक है, और यह देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए भारत के दृढ़ निश्चय को दर्शाता है। यह ऑपरेशन ‘सिंदूर’ उन उजड़े हुए घरों और सूने हुए मांगों की चीख है, जो अब शांत नहीं बैठेगा, बल्कि न्याय की ज्वाला बनकर दुश्मनों को भस्म करेगा।


