आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला
केंद्र सरकार की इंडस्ट्रियल डवेलपमेंट स्कीम (आईडीएस) के अचानक बंद होने से हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के 1,500 उद्योगों को अनुदान (ग्रांट) नहीं मिल पाया है। योजना के तहत उद्यमियों ने पोर्टल पर पंजीकरण तो करवा लिया, लेकिन योजना के तहत अभी अनुदान नहीं मिला है। दरअसल, केंद्र सरकार ने साल 2017 में हिमाचल व उत्तराखंड में उद्योगों के विकास के लिए आईडीएस योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत अगर कोई उद्यमी 100 करोड़ रुपए तक निवेश करता है तो उसे 30 फीसदी अनुदान मिलना था। इस योजना में हिमाचल में 975 व उत्तराखंड में 525 उद्योगपतियों ने ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कर अपने उद्योग स्थापित किए थे।
संचालकों ने अनुदान को ध्यान में रख कर बैंकों से लोन उठा लिए। इस बीच साल 2020 में केंद्र ने इस योजना को अचानक बंद कर दिया, जबकि यह योजना 2023 में बंद होनी थी। अचानक योजना के बंद होने से सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान नहीं मिल पाया। उद्यमी अनुदान लेने के लिए चक्कर काट रहे हैं। लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष हरबंस पटियाल ने बताया कि इस बारे में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मिले और उन्हें हिमाचल व उत्तराखंड के उद्योगपतियों की समस्या से अवगत कराया गया। लेकिन अभी तक उद्योगपतियों को अनुदान नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि इस बारे में सांसद सुरेश कश्यय के माध्यम से केंद्रीय मंत्री से मिलने की भी योजना बनाई है।
हिमाचल व उत्तराखंड का करोड़ों रुपये का अनुदान इस योजना के अचानक बंद होने से डूब गया है। ऊना के उद्योगपति आरजी अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इस योजना के तहत पंजीकरण करने के बाद 40 करोड़ का निवेश किया था। उम्मीद थी कि इसके बदले में 5 करोड़ अनुदान मिलेगा, वह योजना के बंद होने से नहीं मिला है। इससे उनकी बैंक की देनदारी बढ़ गई है। नालागढ़ के उद्योगपति हरबंस पटियाल ने बताया कि पांच करोड़ रुपए लगाया था, उन्हें 30 फीसदी वापस मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अभी तक नहीं मिला।


