अमरीका में बोले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, देश को चीन की तरह प्रोडक्शन बढ़ाने पर देना होगा ध्यान
आवाज जनादेश / न्यूज ब्यूरो शिमला
विपक्ष के नेता के तौर पर पहली बार विदेश दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने अमरीका के टेक्सास में दो कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पहले उन्होंने डलास में भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। इसके बाद सोमवार को यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के छात्रों से भारतीय राजनीति, इकोनॉमी और भारत जोड़ो यात्रा समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। राहुल गांधी ने कहा कि भारत में सब मेड इन चाइना है। इसलिए भारत में रोजगार मिलने में दिक्कत होती है। चीन ने प्रोडक्शन पर ध्यान दिया है, इसलिए चीन में रोजगार की दिक्कतें नहीं हैं। पूरी दुनिया में रोजगार की दिक्कत नहीं है। वेस्ट में रोजगार की दिक्कत है। भारत में भी है, लेकिन चीन में नहीं है। वियतनाम में नहीं है। इसका कारण है। 1950 में अमरीका प्रोडक्शन का सेंटर माना जाता था।
टीवी, कार जैसी चीजें सिर्फ यहीं बनती थीं। इसके बाद प्रोडक्शन चीन में होने लगा। भारत में रोजगार की समस्या है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमने प्रोडक्शन पर ध्यान नहीं दिया। भारत में सब कुछ मेड इन चाइना है। सिर्फ एक-दो लोगों को सारे पोट्र्स और सारे डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट दिए जाते हैं। इसी कारण भारत में मैन्युफैक्चरिंग की स्थिति ठीक नहीं है। कार्यक्रम में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा कि राहुल गांधी पप्पू नहीं हैं, वह पढ़े-लिखे हैं और किसी भी मुद्दे पर गहरी सोच रखने वाले स्ट्रैटजिस्ट हैं।
आरएसएस पर भी निशाना, विचारों की बहुलता पर जोर
डलास। राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां ‘उनका मानना है कि भारत एक विचार है, वहीं कांग्रेस का मानना है कि भारत विचारों की बहुलता वाला देश है। भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए श्री गांधी ने कहा कि हमारा मानना है कि हर किसी को सपने देखने की अनुमति दी जानी चाहिए और उनकी जाति, भाषा, धर्म, परंपरा या इतिहास की परवाह किए बिना उन्हें भाग लेने की अनुमति एवं स्थान दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि 2024 का आम चुनाव भाजपा के लिए एक बड़ा झटका था साथ ही कहा कि हमने देखा कि चुनाव परिणाम के कुछ ही मिनटों के भीतर, भारत में कोई भी भाजपा या भारत के पीएम से नहीं डरता था। इसलिए ये बहुत बड़ी उपलब्धियां हैं। यह उपलब्धि भारत के लोगों की है, जिन्होंने लोकतंत्र को महसूस किया, जिन्होंने महसूस किया कि हम अपने संविधान पर हमले को स्वीकार नहीं करेंगे।
भारत की राजनीति में बोलने से ज्यादा जरूरी सुनना
राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय राजनीति में सुनना, बोलने से कहीं ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। सुनने का मतलब है खुद को दूसरे की जगह पर रखना। अगर कोई किसान मुझसे बात करता है, तो मैं खुद को उनके रोजमर्रा के जीवन में शामिल करने की कोशिश करूंगा और समझूंगा कि वे क्या कहना चाह रहे हैं। सुनना बुनियादी बात होती है।


