हिमाचल की राजनीति का एक और युग का अंत,GS बाली का दिल्ली स्थित AIIMS में निधन

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आवाज़ जनादेश/ बिशेष

हिमाचल को विकास के अग्रणी श्रेणी में ले जाने वाले कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री GS बाली अब इस दुनिया में नहीं रहे। देर रात दिल्ली स्थित AIIMS में पूर्व मंत्री बाली ने अपनी आखिरी सांस ली,वरिष्ठ नेता बाली काफी समय से बीमार चल रहे थे और उनका AIIMS  में इलाज चल रहा था। लेकिन,शुक्रवार देर शाम उनकी तबीयत काफी ज्यादा खराब हुई और उन्होंने दुनिया अलविदा कह दिया। मिली जानकारी के मुताबिक जीएस बाली के पार्थिव शरीर को एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली से कांगड़ा लाने की तैयारी की जा रही है। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर कांगड़ा लाया जाएगा. बीमारी के दौरान उनके बेटे और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव आरएस बाली समेत पूरा परिवार उनके साथ ही था. फिलहाल, इस बड़े आघात से पूरा परिवार सदमे में है. पूर्व मंत्री के निधन की औपचारिक सूचना उनके बेटे आरएस बाली ने दी है. फेसबुक पेज पर आरएस बाली ने यह दुखद सूचना देते हुए तमाम समर्थकों से धैर्य बनाए रखने और अपने पिता के आदर्शों को संजोये रखने की अपील की है।उधर,जीएस बाली के निधन की ख़बर से नगरोटा बगवां, कांगड़ा समेत समूचे हिमाचल प्रदेश में शोक की लहर है. पूर्व मंत्री बाली के चाहने वाले तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। जीएस बाली के चाहने वाले तमाम लोग सदमे में हैं।
गुरमुख सिंह बाली के बारे कुछ खास
गुरमुख सिंह बाली नगरोटा बगवां,हिमाचल प्रदेश, विधान सभा के पूर्व सदस्य थे । उनका जन्म 27 जुलाई 1954 को कांगड़ा में हुआ था और 30 अक्टूबर,2021 की सुबह एम्स दिल्ली में उनका निधन हो गया।
उनके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा है । उन्होंने 20 जून 1977 को शादी की। वह हिमाचल प्रदेश कैबिनेट में परिवहन,खाद्य,नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले और तकनीकी शिक्षा मंत्री थे।
जीएस बाली हिमाचल नागरिक सुधार सभा के संस्थापक अध्यक्ष हैं। वह हिमाचल सामाजिक निकाय संघ के उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष थे। वे 1990 से 1997 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस विचार मंच के संयोजक रहे। वे 1995 से 1998 तक कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष रहे। वे 1993 से 1998 तक हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त सचिव भी रहे।
वह 1998 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए और 2003, 2007 और 2012 में फिर से चुने गए। उन्हें 6 मार्च 2003 को परिवहन मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया । वह 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के अरुण कुमार से हार गए। 

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