प्रेस विज्ञप्ति, शिमला दिनांक 19 मई, 2026
विश्व पटल पर भारत की बढ़ती साख और मजबूत कूटनीति के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अपनी पांच देशों की महत्वपूर्ण यूरोपीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन के सर्वोच्च राजकीय सम्मान “Commander Grand Cross of the Royal Order of the Polar Star” से अलंकृत किया गया है। गोटेनबर्ग में आयोजित एक भव्य और विशेष समारोह में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया ने पीएम मोदी को इस ऐतिहासिक पदक से नवाजा।
यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के बढ़ते वैश्विक गौरव का प्रतीक है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के नाम अब तक रिकॉर्ड 31 अंतरराष्ट्रीय सम्मान दर्ज हो चुके हैं, जो किसी भी भारतीय राष्ट्रप्रमुख के लिए एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कीर्तिमान है।भाजपा प्रदेश महामंत्री व सांसद प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री एशिया के पहले नेता जिन्हें यह गौरव मिला!
18वीं शताब्दी (साल 1748) से शुरू किया गया ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ स्वीडन का बेहद प्रतिष्ठित और प्राचीन सम्मान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह सर्वोच्च सम्मान पाने वाले पहले एशियाई नेता बन गए हैं। स्वीडन सरकार ने यह सम्मान पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व (Visionary Leadership) और भारत-स्वीडन संबंधों को एक नई रणनीतिक ऊंचाई पर ले जाने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए दिया है। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) में बदलने पर भी मुहर लगी है।
सांसद प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल ने भारत की विदेश नीति को ‘रक्षात्मक’ से ‘आक्रामक और आत्मनिर्भर’ मोड में बदल दिया है। दुनिया आज भारत को एक ‘फॉलोअर’ के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘ग्लोबल एजेंडा सेटर’ के रूप में देखती है
उन्होने कहा कि सऊदी अरब, यूएई, रूस, अमेरिका, फ्रांस और अब स्वीडन जैसे तमाम वैश्विक महाशक्तियों और अलग-अलग विचारधारा वाले देशों से भारत के रिश्ते आज अपने सबसे सुनहरे दौर में हैं।और जी-20 (G20) की ऐतिहासिक सफलता से लेकर विकासशील देशों के नेतृत्व तक, मोदी सरकार ने वैश्विक मंचों पर भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर अग्रसर किया है।
कूटनीति के साथ-साथ घरेलू मोर्चे पर भी पीएम मोदी ने स्वीडिश कंपनियों को संबोधित करते हुए भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई (AI), ग्रीन हाइड्रोजन और डीप-टेक मैन्युफैक्चरिंग में निवेश के लिए आमंत्रित किया, जिससे साफ है कि भारत आज वैश्विक व्यापार का सबसे भरोसेमंद केंद्र बन चुका है।
“यह 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है”
सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा की तरह अपनी इस व्यक्तिगत उपलब्धि को देश को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार भारत और स्वीडन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की जीत है और वे इसे भारत की जनता तथा दोनों देशों की अटूट दोस्ती को समर्पित करते हैं। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की स्वीडन यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष स्मृति चिन्ह भी साझा किए गए, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
प्रोफेसर कुमार ने कहा कि जब दुनिया भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रही है, ऐसे समय में यूरोप के एक प्रमुख देश द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री को यह सर्वोच्च सम्मान देना यह साबित करता है कि विश्व शांति, स्थिरता और विकास के लिए आज दुनिया को पीएम मोदी के ‘विश्व मित्र’ दृष्टिकोण पर पूरा भरोसा है। भारत की यह वैश्विक धमक आने वाले दशकों में देश की तरक्की की नई इबारत लिखेगी।


