#चौपाल में ‘चुनावी वादों’ की बिसात या विकास का वनवास?
#चौपाल (हिमाचल प्रदेश): चौपाल विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है। मामला विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और विधायक बलबीर वर्मा के उस ताजा बयान से जुड़ा है, जिसने स्थानीय जनता के बीच नई बहस छेड़ दी है। #भरानु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विधायक ने कहा कि सैंज-फेडीचपुल सड़क को तब चौड़ा किया जाएगा, यदि 2027 में जनता उन्हें फिर से विधानसभा भेजती है।
इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या विकास अब सिर्फ ‘अगली बार’ की शर्तों पर निर्भर है?
#सड़कों के नाम पर करोड़ों का खेल?
चौपाल की सड़कों पर विभागीय कार्यप्रणाली और बजट के खर्च को लेकर कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
* #सैंज से तारापुर मार्ग: विभाग ने 10 किलोमीटर के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च दर्शाया, लेकिन धरातल पर सड़क मात्र 7 किलोमीटर बनी है। तारापुर तक अभी भी सड़क नहीं पहुंची है।
* #बजट लैप्स होने का मामला: इसी सड़क के लिए आवंटित 21 करोड़ रुपये लैप्स हो गए। आरोप है कि लोकनिर्माण विभाग ठियोग मंडल ने आगे के बजट की मांग ही नहीं की।
* #देहा-खिड़की मार्ग: 10 किलोमीटर सड़क के टेंडर में करीब 8.5 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
* #CRF बजट पर चुप्पी: केंद्र सरकार से आने वाले करोड़ों के बजट (CRF) में धांधली की चर्चाएं हैं, लेकिन सवाल यह है कि विधायक इस पर मौन क्यों हैं?
#13साल का शासन और ‘2027’ का इंतज़ार
जनता अब समय का हिसाब मांग रही है। विधायक वर्मा के कार्यकाल को लगभग 13 वर्ष (156 महीने) बीत चुके हैं। गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद चौपाल NH (नेशनल हाईवे) की सुविधा से अछूता क्यों है?
> “#जब सारा पैसा केंद्र से आ रहा है, तो 13 साल के शासन के बाद भी विधायक 2027 की शर्त क्यों रख रहे हैं? क्या यह आने वाले चुनाव के लिए सियासी गोटियां फिट करने की कोशिश है?” — स्थानीय नागरिक
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#कहाँ गायब हुआ घोषित NH?
एक बड़ा सवाल सोलन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा की गई उस घोषणा पर भी है, जिसमें चौपाल को NH की सौगात मिली थी। उस समय विधायक कांग्रेस के एसोसिएट सदस्य थे। आरोप है कि विभाग ने न तो इसकी सही रिपोर्ट भेजी और न ही DPR तैयार हुई, जिसका खामियाजा आज चौपाल की जनता भुगत रही है।


