साहस का दूसरा नाम: ऋतिक चौहान

Date:

साहस का दूसरा नाम: ऋतिक चौहान—जिन्होंने दूसरों की मुस्कान के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया

कहते हैं कि नायक (Hero) वह नहीं होता जो केवल अपनी जीत के लिए लड़े, बल्कि नायक वह है जो दूसरों की जान बचाने के लिए खुद को मौत के मुँह में झोंक दे। हिमाचल प्रदेश के चौपाल मंडल के छोटे से गाँव गागना में जन्मे ऋतिक चौहान पिता जगदीश चौहान पेशे से एक पिता और माता पुष्पा चौहान पेशे से गृहिणी है,आज उनका बेटा वीरता का जीवंत उदाहरण बन चुका हैं।

वह एक पल और फौलादी इरादा

सोलन के रेलवे ट्रैक पर जब दो मासूम बच्चियों की जिंदगी काल (ट्रेन) के सामने खड़ी थी, तब वहाँ मौजूद कई लोग सहम गए होंगे, लेकिन ऋतिक की नसों में दौड़ती वीरता ने उन्हें रुकने नहीं दिया। अपनी जान की परवाह किए बिना, ऋतिक बिजली की गति से ट्रैक पर कूदे और उन बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बच्चियाँ बच गईं, लेकिन इस महान कार्य की कीमत ऋतिक को अपने एक पैर को खोकर चुकानी पड़ी।
चोटें गहरी थीं, पर हौसला उससे भी ऊँचा

हादसे के बाद ऋतिक को सोलन से आईजीएमसी शिमला और फिर पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। इलाज के दौरान चिकित्सकों को उनका एक पैर काटना पड़ा और दूसरे पैर की उंगलियां भी चली गईं। एक युवा के लिए यह मानसिक और शारीरिक रूप से टूट जाने वाला क्षण हो सकता था, लेकिन ऋतिक की आंखों में आज भी वही चमक है जो उस दिन ट्रैक पर थी। उन्होंने साबित कर दिया कि “शरीर के अंग कम हो सकते हैं, लेकिन साहस कभी अपाहिज नहीं होता।”

देश और प्रदेश का मिला सम्मान

ऋतिक की इस निस्वार्थ बहादुरी को पूरा देश सलाम कर रहा है।
* राष्ट्रपति सम्मान: भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्वारा ऋतिक को वर्ष 2025 के लिए ‘उत्तम जीवन रक्षा पदक’ से सम्मानित किया गया है।

* राज्य स्तरीय सम्मान: हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से राज्यपाल महोदय ने उन्हें शिमला में सम्मानित कर उनके जज्बे को सराहा है।

युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

आज ऋतिक केवल एक दुर्घटना के ‘सर्वाइवर’ नहीं हैं, बल्कि वे करोड़ों युवाओं के लिए एक प्रेरणा पुंज हैं। जब लोग अपनी छोटी-छोटी समस्याओं से हार मान लेते हैं, तब ऋतिक का चेहरा हमें याद दिलाता है कि इंसान अपने अंगों से नहीं, बल्कि अपने ऊँचे चरित्र और निःस्वार्थ कर्मों से महान बनता है।

ऋतिक चौहान जैसे सपूत पर न केवल उनके माता-पिता और चौपाल क्षेत्र को गर्व है, बल्कि पूरा भारतवर्ष उनके साहस के आगे नतमस्तक है।
ऋतिक, आपके जज्बे को शत-शत नमन! आपकी बहादुरी की यह गाथा पीढ़ियों तक सुनाई जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

मृत्यु के पश्चात मनुष्य के साथ मनुष्य की पाँच वस्तुएँ साथ जाती हैं?

मृत्यु के पश्चात मनुष्य के साथ मनुष्य की पाँच...

हिमाचल में अवैध कब्जे करने वाले 1.60 लाख परिवार नहीं लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव

हिमाचल में अवैध कब्जे करने वाले 1.60 लाख परिवार...

स्वास्थ्य सेवाओं पर सियासत और सिसकती संवेदनाएं

स्वास्थ्य सेवाओं पर सियासत और सिसकती संवेदनाएं राजेश रढाईक प्रधान...