हिमाचल के लघु किसानों की बड़ी जीत: सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षित किया ‘आजीविका का अधिकार’

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हिमाचल के लघु किसानों की बड़ी जीत: सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षित किया ‘आजीविका का अधिकार’

भारतीय किसान संघ ने दी दस्तक, पांच बीघा से कम भूमि वाले किसानों के सेब बगीचों पर अब नहीं चलेगी कुल्हाड़ी; सरकार से मालिकाना हक की मांग
शिमला।
हिमाचल प्रदेश के हजारों लघु एवं सीमांत किसानों के लिए राहत की एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर आई है। सर्वोच्च न्यायालय (SC) के ताजा रुख ने प्रदेश उच्च न्यायालय के उन फैसलों को निरस्त कर दिया है, जिनके तहत वन्य भूमि पर बसे किसानों के फलदार बगीचों को हटाने या काटने के निर्देश दिए गए थे। भारतीय किसान संघ (BKS) ने इसे संविधान प्रदत्त ‘सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार’ की जीत करार दिया है।
संविधान की धारा 21: आजीविका ही जीवन का आधार
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री उमेश सूद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस रुख से उन किसानों को बल मिला है, जिनके पास 5 बीघा से कम भूमि है और जिनका जीवन पूरी तरह से वन्य भूमि पर दशकों की मेहनत से उगाए गए सेब के बगीचों पर निर्भर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान की धारा 21 भारत के प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन और आजीविका का अधिकार देती है। इन बगीचों को काटना न केवल आर्थिक प्रहार है, बल्कि मानवीय अधिकारों का उल्लंघन भी है।
किसान अपराधी नहीं, पर्यावरण के रक्षक हैं
संघ ने तर्क दिया है कि इन बगीचों को अवैध कब्जा मानकर किसानों को अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
* आर्थिक सुरक्षा: यह बगीचे किसानों की पीढ़ियों की मेहनत और एकमात्र आय का स्रोत हैं।
* पर्यावरण संरक्षण: सेब के ये लाखों पेड़ कार्बन उत्सर्जन को अवशोषित कर पर्यावरण को शुद्ध करने में अतुलनीय योगदान दे रहे हैं।
* सामाजिक सरोकार: यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि प्रदेश के गरीब और भूमिहीन किसानों के अस्तित्व का सवाल है।
पुनर्वास और नीति निर्धारण की मांग
उमेश सूद ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय ने प्राकृतिक आपदाओं के कारण बेघर और भूमिहीन हुए किसानों के पुनर्वास का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया है। भारतीय किसान संघ अब केंद्र और प्रदेश सरकार से पुरजोर मांग करता है कि:
* मालिकाना हक: 5 बीघा से कम भूमि वाले लघु एवं सीमांत किसानों को उन बगीचों का कानूनी मालिकाना हक दिया जाए।
* ठोस नीति: सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप किसानों के हित में तत्काल नई नीति बनाई जाए।
> “सेब के पेड़ केवल कृषि आय का जरिया नहीं, बल्कि किसान की दशकों की तपस्या है। सरकार को अब किसानों के हित में कानून बनाकर उन्हें उजाड़ने के बजाय बसाने का कार्य करना चाहिए।”
उमेश सूद, प्रदेश महामंत्री, भारतीय किसान संघ

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