हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में रोजगार के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के जमकर नोंकझोक हुई.

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फोटो के साथ एमएमहिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: रोजगार के मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन राज्य में 58 वर्ष की पक्की नौकरी देने के मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान नौकरियों के वादे को लेकर सत्ता पक्ष को घेरा और उन पर गारंटियों के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वयं मोर्चा संभाला और विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। इस दौरान युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए।
भाजपा का सवाल: पक्की नौकरी के वादे का क्या हुआ?
भाजपा सदस्य बिक्रम ठाकुर ने अनुपूरक प्रश्न में पूछा, “कांग्रेस ने 58 वर्ष की पक्की नौकरी देने का जो वादा किया था, उसका क्या हुआ?। उन्होंने यह भी पूछा कि पिछले वर्ष 35 हजार रोजगार का आँकड़ा अब 23 हजार कैसे हो गया?। इसके बारे में सदन में स्पष्ट जानकारी दी जाए।”

इससे पहले विधायक विपिन सिंह परमार और सतपाल सिंह सत्ती के मूल प्रश्नों के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और विधायक बिक्रम सिंह के अनुपूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “कांग्रेस ने चुनाव के दौरान जनता से जो वादे किए हैं, उन्हें पाँच साल में पूरा किया जाएगा। लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग के माध्यम से जो भी युवा चयनित होकर आएँगे, उन्हें दो साल बाद नियमित किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए बिना पद सृजित किए ही संस्थान खोल दिए, लेकिन उनकी सरकार ऐसा नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने विभिन्न विभागों में 5,960 नए पद सृजित किए हैं।
जल्द मिलेगी एनटीटी शिक्षकों को नियुक्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 6,200 एनटीटी शिक्षकों की नियुक्ति का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है और उन्हें अगले दो माह में नियुक्ति दे दी जाएगी। उन्होंने बताया कि केवल शिक्षा विभाग में ही सात हजार पद भरे गए हैं। इसके अतिरिक्त 5,000 पम्प ऑपरेटर और 1,100 नर्सों के पद भी भरे गए हैं। कई पदों को भरने का मामला आयोग को भेजा गया है और 200 डॉक्टरों के पदों का परिणाम भी जल्द ही घोषित होने वाला है।


विदेशों में भी रोजगार के अवसर

सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार प्रदेश के युवाओं को विदेशों में भी रोजगार मुहैया करवा रही है। इसके लिए यूरोप और जापान की एम्बैसी से बातचीत चल रही है। भारत सरकार से इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन को इसका लाइसेंस भी मिल गया है और सऊदी अरब में कुछ युवाओं को रोजगार दिलाया भी जा चुका है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि इस साल नौकरियों की भरमार होगी। उन्होंने यह भी बताया कि निजी क्षेत्र में निकले रोजगार के अवसरों के अलावा विदेश में भी रोजगार दिलाया गया है, जिसके लिए ओवरसीज रोजगार का एक अलग विभाग बनाया गया है।
विपक्ष ने उठाए आँकड़ों पर सवाल
भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने नौकरियों के आँकड़ों को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले साल भी उन्होंने यही सवाल किया था, तब 34,980 को रोजगार देने की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब 15 अगस्त को मुख्यमंत्री ने 23,191 को रोजगार देने की बात कही है। उन्होंने इस विरोधाभास पर सवाल उठाते हुए कहा, “नौकरियों के आँकड़ों में यह अंतर कैसे आया?। मुख्यमंत्री का यह कथन विरोधाभासी है और उन्हें प्रदेश के युवाओं से माफी माँगनी चाहिए।” उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान पाँच साल में पाँच लाख रोजगार देने का वादा किया था, जिसके अनुसार ढाई साल में ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलना चाहिए था।
‘सदन में झूठ बोला जा रहा है’
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी सत्ता पक्ष पर सदन में असत्य बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सरकार जो आँकड़े गिना रही है, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि इसमें से कितने पद पूर्व सरकार के समय सृजित हुए थे और भर्ती के लिए प्रक्रियाधीन थे। क्या कांग्रेस अपने चुनावी घोषणापत्र के अनुसार पाँच साल में पाँच लाख युवाओं को नौकरी देने के वादे को पूरा करेगी?”
वहीं, सतपाल सिंह सत्ती ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस ने जब अपना चुनाव घोषणापत्र बनाया होगा, तो शायद मुख्यमंत्री सुक्खू को उसमें शामिल ही नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि जनता को गुमराह कर सत्ता प्राप्त करने से लोकतंत्र कमजोर होता है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अनुबंध प्रथा को ट्रेनी में बदल दिया गया है, और क्या इसे दोबारा वापस लिया जाएगा?
‘विपक्ष परेशान और कन्फ्यूज है’
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष न केवल परेशान है, बल्कि कन्फ्यूज भी है। उन्होंने कहा, “मैं बार-बार कह रहा हूँ कि आँकड़े नोट कर लें, लेकिन वे सदन से बाहर जाने के बहाने ढूँढ रहे हैं।” उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे झूठ बोल रहे हैं तो उनके खिलाफ प्रिविलेज लाया जाए।

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