किन्नौर कैलाश के दर्शन कर छलक आईं आंखें, भक्ति में डूबे श्रद्धालु,जानें कैसा रहा सफर

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

भगवान शिव के दर्शनों की व्याकुलता और पहाड़ जैसे हौसले की झलक मंगलवार रात किन्नौर कैलाश यात्रा में देखने को मिली, जब श्रद्धालु रात 2 बजे बारिश के बीच दुर्गम ट्रैक पर निकले और कठिन यात्रा के बाद दोपहर तक किन्नौर कैलाश के दर्शन किए। इस दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें छलक आईं और वे भक्ति में डूब गए।

किन्नौर की श्रद्धालु आंचल ने बताया कि पार्वती कुंड तक का सफर तो ठीक था, लेकिन उसके बाद की चढ़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण रही। किन्नौर कैलाश का ट्रैक शानदार रहा। ऊपर पहुंचकर ऐसा लगा जैसे सब कुछ सपना सा है, भोलेनाथ के दर्शन के बाद सबकुछ पूरा हो गया। वहीं मंडी से पहुंचे सनातनी गोसेवक ठाकुर बोधराज ने कहा कि वह दूसरी बार किन्नौर कैलाश यात्रा पर आए हैं। लोग कहते हैं कि सभी कैलाश बार-बार, किन्नौर कैलाश एक बार, लेकिन मैं मानता हूं कि अगर श्रद्धा है तो किन्नौर कैलाश भी बार-बार आना चाहिए। कहा कि यहां हर उम्र का व्यक्ति पहुंच सकता है, बस मन में श्रद्धा हो। अगर श्रद्धा नहीं तो कई लोग रास्ते से भी लौट जाते हैं।

हरियाणा से आए श्रद्धालु निहार ने कहा कि किन्नौर कैलाश श्रीखंड महादेव से भी कठिन यात्रा है। कहा कि मैं श्रीखंड की यात्रा कर चुका हूं, लेकिन किन्नौर कैलाश उससे भी कठिन लगा। यहां रात 2 बजे चढ़ाई शुरू करनी पड़ती है और दोपहर 12 बजे तक पहुंचना जरूरी होता है, वरना मौसम खराब हो जाता है। बारिश और ट्रेल की फिसलन ने यात्रा और कठिन कर दी। पहले बेस कैंप से तांगलिंग से करीब 19 किमी की खड़ी चढ़ाई के बाद भोले बाबा के दर्शन होते हैं।

20 मिनट तक बैठकर रोता रहा निहार

निहार ने कहा कि जब शिव के दर्शन किए तो 20 मिनट मैं वहीं बैठकर रोया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनकी आंखें खुद ही नम हो गईं। श्रद्धालुओं ने बताया कि बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं सभी हिम्मत और श्रद्धा के साथ इस कठिन यात्रा में भाग ले रहे हैं। यहां पहुंचने के लिए सिर्फ शरीर नहीं, मन भी तैयार होना चाहिए। कई लोग ऐसे भी हैं, जो दर्शन किए बिना लौट जाते हैं।

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