हिमाचल प्रदेश पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा 122(1)(c) (और न कि 122(1)(d)) के तहत सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाला व्यक्ति पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता। यह नियम, यदि परिवार के किसी सदस्य (ससुर/सास सहित) का अवैध कब्जा है, तो बहू के चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाता है। यह कड़ा प्रावधान 1.60 लाख से अधिक परिवारों के लिए लागू है।
मुख्य विवरण:
•अयोग्यता: सरकारी या पंचायत भूमि पर कब्जा करने वाले, या उनके परिवार (पति/पत्नी, सास-ससुर, माता-पिता, बेटा-बेटी) के सदस्य चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं
•कानूनी आधार: हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(c) के अनुसार, जो ‘अतिक्रमण’ के आधार पर अयोग्यता निर्धारित करती है।
•हालिया बदलाव: अब यदि ससुर का सरकारी जमीन पर कब्जा है, तो बहू भी चुनाव नहीं लड़ पाएगी।
•निर्णय: 2020 के राज्य चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, केवल कब्जा होना ही काफी है, यह जरूरी नहीं कि अतिक्रमण हटा दिया गया हो या घोषित कर दिया गया हो।
•अपवाद: वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) के तहत दावा दायर करने वालों को अब अयोग्य नहीं माना जाएगा।
•यह नियम पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अवैध कब्जों को कम करने के लिए सख्ती से लागू किया जा रहा है।
हिमाचल में अतिक्रणकारियों के पंचायत चुनाव लड़ने पर विवाद:
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