आवाज जनादेश/न्यूज ब्यूरो शिमला
जुनून हो तो बेटियाँ मुसीबतों और चुनौतियों को पारकर ऊंचाइयां छू सकती हैं। हिमाचल के कोटखाई की रहने वाली डॉ. इतिका चौहान ने यह साबित कर दिखाया है। ब्रेन ट्यूमर और आंखों की कम रोशनी जैसी विकट बाधाओं के बावजूद, इतिका ने अपनी पढ़ाई का जुनून नहीं छोड़ा और अब उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की है।
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष, प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. इतिका चौहान उन चुनिंदा दृष्टिबाधित लोगों में से हैं जिन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। वर्तमान में, वह मतियाना के राजकीय बॉयज स्कूल में राजनीति विज्ञान की लेक्चरर के रूप में कार्यरत हैं।
डॉ. इतिका चौहान ने लोक प्रशासन विभाग से “गैर सरकारी संगठनों का हस्तक्षेप और महिला सशक्तिकरण: शिमला जिले की केस स्टडी” विषय पर अपना शोध पूरा किया। हाल ही में उनकी पीएचडी की डिग्री पूरी होने की अधिसूचना जारी हुई है। उनके शोध की मार्गदर्शक प्रो. अनुपमा कंवर थीं।
इतिका चौहान जब चौथी कक्षा में थीं, तभी उन्हें ब्रेन ट्यूमर का पता चला। पीजीआई चंडीगढ़ में उनका इलाज शुरू हुआ, लेकिन ब्रेन ट्यूमर के कारण उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होती चली गई। इस दौरान उनके दो ऑपरेशन भी हुए और अभी भी उन्हें नियमित जांच के लिए पीजीआई जाना पड़ता है।
पढ़ने-लिखने में गंभीर दिक्कत आने के बावजूद, इस प्रतिभाशाली छात्रा ने अपना हौसला नहीं खोया और हमेशा प्रत्येक कक्षा बेहतरीन अंकों के साथ उत्तीर्ण की। उन्होंने आठवीं तक की पढ़ाई जुब्बल से, 12वीं राजकीय कन्या विद्यालय, लक्कड़ बाजार से और बीए आरकेएमवी शिमला से की। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन विषय में एमए और अब पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।
इतिका ने अपनी अधिकांश पढ़ाई ऑनलाइन और बड़े प्रिंट के माध्यम से की। छोटे प्रिंट को पढ़ने के लिए वह मैग्नीफाइंग ग्लास का भी उपयोग करती थीं। डॉ. इतिका चौहान पिछले लगभग तीन वर्षों से मतियाना के राजकीय बॉयज स्कूल में राजनीति विज्ञान की लेक्चरर हैं और काफी समय से उमंग फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई हैं। उनके पिता श्री जगदीश चौहान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त हुए हैं और उनकी माता श्रीमती रीता चौहान गृहिणी हैं।
डॉ. इतिका चौहान अपनी इस उल्लेखनीय सफलता का श्रेय अपने परिजनों, अपनी शोध पर्यवेक्षक प्रो. अनुपमा कंवर, अपने मित्रों और विशेष रूप से उमंग फाउंडेशन को देती हैं, जिसके प्रयासों से उनकी उच्च शिक्षा में काफी मदद मिली। उनकी यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।


