बिजली बोर्ड, पावर कारपोरेशन, ऊर्जा निदेशालय से शिफ्ट किए जाएंगे 40 पद

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने एकीकृत विद्युत व्यापार इकाई के रूप में ऊर्जा प्रबंधन केंद्र का पुनर्गठन कर दिया है। बुधवार को राजपत्र में ऊर्जा सचिव की ओर से इस बाबत अधिसूचना जारी की गई। केंद्र को सफलतापूर्वक चलाने के लिए बिजली बोर्ड, पावर कारपोरेशन और ऊर्जा निदेशालय से विभिन्न श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों के 40 पद शिफ्ट किए जाएंगे। अभी अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से प्रदेश से बाहर बिजली बेची जा रही है। ऊर्जा प्रबंधन केंद्र के काम शुरू करने पर एक एजेंसी के माध्यम से यह काम किया जाएगा। इससे प्रदेश की आय में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।

प्रदेश मंत्रिमंडल ने बीते वर्ष ऊर्जा प्रबंधन केंद्र के माध्यम से बाहरी राज्यों को बिजली बेचने का काम शुरू करने का फैसला लिया था। फैसला लागू करने के लिए ऊर्जा प्रबंधन केंद्र की स्थापना का कुछ माह पूर्व काम शुरू हुआ था। अब सरकार ने सुचारू तौर पर कार्य करने के लिए ऊर्जा प्रबंधन केंद्र के पुनर्गठन से संबंधित दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि तीनों संस्थाओं बिजली बोर्ड, पावर कारपोरेशन और ऊर्जा निदेशालय की ओर से किए जा रहे असंगत व्यापार के कारण अक्सर उप-इष्टतम मूल्य निर्धारण, अकुशल नियोजन और बेमेल विद्युत खरीद और बिक्री के कारण नुकसान हो रहा था।

विश्व बैंक ने अपने विद्युत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत अधिसूचना में कुछ बदलाव किया है। बदलाव के तहत ऊर्जा प्रबंधन केंद्र सभी राज्य के स्वामित्व वाली उपयोगिताओं के लिए बिजली खरीद, बिक्री, बैंकिंग, पूर्वानुमान, योजना और वास्तविक समय की निगरानी को संभालेगा। नए संगठनात्मक ढांचे को बनाने के लिए बिजली बोर्ड, पावर कारपोरेशन और ऊर्जा निदेशालय से 40 पद शिफ्ट किए जाएंगे। सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता को एरिया लोड डिस्पैच सेंटर (एएलडीसी) में चौबीसों घंटे शिफ्ट में तैनात किया जाएगा। शुरुआती तैनाती छह महीने के आधार पर होगी, इसके बाद स्थायी नियुक्ति के लिए सहमति प्राप्त की जाएगी।

अधिसूचना के अनुसार ऊर्जा प्रबंधन केंद्र नो प्रॉफिट-नो लॉस के आधार पर काम करेगा। बिजली बोर्ड, पावर कारपोरेशन और ऊर्जा निदेशालय द्वारा उनके अनुबंधित बिजली क्षमताओं के अनुपात में खर्च साझा किया जाएगा। निदेशक ऊर्जा की देखरेख में केंद्र काम करेगा। वित्तीय निहितार्थ, बिजली निपटान दरों और नियामक अनुपालन के अनुमोदन के लिए विनियामक आयोग के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। इस बदलाव से बिजली खरीद दक्षता में सुधार, लागत में कमी, बाजार भागीदारी को मजबूत करने और हिमाचल प्रदेश को जटिल बिजली बाजारों में बेहतर तरीके से काम करने के लिए तैयार करने की उम्मीद है।

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