बिना तार और प्लग के चार्ज होंगे अब इलेक्ट्रिक वाहन, एएनआरएफ से शोध को मिली मंजूरी

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आवाज़ जनादेश / न्यूज़ ब्यूरो शिमला

अब बिना तार-प्लग के वायरलेस चार्जर सिस्टम से इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज हो सकेंगे। केंद्र सरकार के अनुसंधान राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन (एएनआरएफ) की ओर से शुरू किए गए मिशन फॉर हाई इंपेक्ट एरिया (माहा) कार्यक्रम के अंतर्गत इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग तकनीक पर आधारित उच्च स्तरीय अनुसंधान परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की कुल लागत 18.36 करोड़ रुपये होगी। एएनआरएफ ने इस प्रोजेक्ट को डेवलपमेंट ऑफ हाई पावर ग्रिड फ्रेंडली एंड स्टैटिक वायरलेस चार्जर फॉर ई-व्हीकल नाम दिया है। बिना प्लग वायरलेस सिस्टम को विकसित करने के लिए हाई कंटडिटव क्वाइल के सेटअप से एक तरह मैग्नेटिक फील्ड तैयार की जाएगी, जिससे इलेक्ट्रिक व्हीकल में मौजूद बैटरी इस मैग्नेटिक फील्ड के संपर्क में आने से ऑटो चार्ज होना शुरू हो जाएगी।

विदेशों में इस्तेमाल हो रही तकनीक

विदेशों में इस तरह की तकनीक वर्तमान में है, लेकिन भारत में अभी तक इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य किया जाना बाकी है। यह बहुसंस्थानीय अनुसंधान परियोजना आईआईटी खड़गपुर के नेतृत्व में चलाई जाएगी, जिसमें कुल छह प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। एनआईटी हमीरपुर इस परियोजना का एक सहयोगी संस्थान है। संस्थान के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के तीन फैकल्टी डॉ. आरके जरियाल, डॉ. जीवनजोत सिंह, डॉ. उपासना शर्मा प्रमुख अन्वेषक के रूप में इस शोध को करेंगे। एनआईटी हमीरपुर में ग्रिड-फ्रेंडली कंडक्टिव हाई पावर ईवी चार्जर विकसित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर 2.15 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार के साथ छह बड़े उद्योग भी स्पांसर कर रहे हैं। अक्तूबर में एएनआरएफ ने विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों और उद्यमियों को सेमिनार में बुलाकर इस विषय पर विचार मांगे थे। एनआईटी हमीरपुर के निदेशक एचएम सुर्यवंशी, रजिस्ट्रार अर्चना नानोटी ने इस उपलब्धि के लिए विशेषज्ञों को बधाई दी है।

बेहद कम समय में चार्ज हो सकेंगे इलेक्ट्रिक व्हीकल

एनआईटी हमीरपुर में इसके लिए तीन वर्ष के भीतर 30 किलोवाट का लैब मॉडल प्रोटोटाइप तैयार किया जाएगा। प्रोजेक्ट 25 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले ग्रिड-फ्रेंडली कंडक्टिव हाई पावर ईवी चार्जर के विकास पर केंद्रित है। यह बस, ट्रक और बड़े वाहनों को बेहद कम समय में चार्ज करने में सक्षम होगा। इसका चार्जर का साइज भी बाजार में मौजूदा चार्जर से कम होगा। यह सौर ऊर्जा से संचालित होगा, जिससे ग्रीन एनर्जी सपोर्ट इंटिग्रेटिड ग्रिड को मिलेगी। यह ग्रिड इंटीग्रेटिड होगा, जो सौर ऊर्जा की माध्यम से संचालित होगा।

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