श्रम निरीक्षक का व्यान हास्यप्रद – पार्षद रजनीश सोनी
09-07-2019
आवाज जनादेश
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हिमाचल प्रदेश
नेर चौक / मंडी
पूजा मंडयाल
ब्यूरो मण्डी
खबर – मंडी डैक्स कार्यालय
*प्रदेश इंटक मंज़दूर नेता एवं नप नेर चौक के पार्षद रजनीश सोनी ने नेर चौक मेडिकल कालेज़ के आउटसोर्सिंग कर्मचारिओं के वेतन गड़बड़ी बारे आये श्रम निरीक्षक मंडी के ब्यान का खंडन किया है और कड़ी निंदा की है और उनके ब्यान को बहुत ही हास्यपद बताया है ।युवा नेता ने कहा कि श्रम निरीक्षक कह रहीं है कि उनके पास नेर चौक मेडिकल कालेज के आउटसोर्सिंग कर्मचारिओं के वेतन की गड़बड़ी के सम्बन्ध में कोई भी शिकायत नहीं आयी है और उनके पास फिलहाल इस बारे कोई जानकारी नहीं है।रजनीश सोनी ने कहा कि वो पिछले वर्ष 2017 से मेडिकल कालेज नेर चौक में आउटसोर्सिंग कम्पनियों की कार्यप्रणाली और मासिक वेतन,EPF,ESI आदि के बारे में RTI से कई संदिग्ध तथ्य और जानकारियां जुटा चुके है और उन्होंने पिछले वर्ष के नवम्बर 2018 में नेर चौक मेडिकल कालेज में RTI कानून के अंतर्गत जानकारी मांगी और उसके बाद जब मेडिकल कालेज ने पूरी जानकारी नहीं उपलब्ध की तो फरवरी 2019 में बकायदा RTI एक्ट के तहत फर्स्ट अपील की याचिका दायर की थी जिसमे आउटसोर्स कर्मचारिओं के नाम, पद, मासिक वेतन, epf,esi और टेंडर प्रक्रिया, टेंडर डॉक्युमेंट, एग्रीमेन्ट पत्र, आदि जुटा चुके हैं।
रजनीश सोनी ने बताया कि RTI से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने 11 फरवरी 2019 को बकायदा श्रम पर्वतन अधिकारी (LEO) मंडी और मुख्य श्रम आयुक्त, हि०प्र को लिखित में शिकायत दर्ज की थी कि आउटसोर्सिंग की एवज में महाघोटाला इन कम्पनियों के माध्यम से मेडिकल कालेज में चल रहा है , जिसके लिए कड़ी करवाई अमल में लाई जाए और जिसके लिए प्रथम चरण में उन्होंने पैरामेडिकल सेवाएं दे रही कम्पनी IL&FS HUMAN RESOURCE PRIVATE LIMITED, स्थित नई दिल्ली शीर्ष पर है और यह कम्पनी हिमाचल के तीन मेडिकल कालेज में करीब 323 कर्मचारिओं की सेवाएं दे रही है।
श्रम अधिकारी मंडी ने उनकी शिकायत पर ज्यादा गौर नहीं किया और जब उन्होंने इसी संदर्भ में पहला रिमाइंडर 31 मई 2019 को भेजा तो श्रम विभाग मंडी के अधिकारी जागे और आनन फानन में उन्होंने लेबर कमिशनर शिमला, उपायुक्त महोदय, मंडी और अतरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं SP, विजिलेंस,आदि सभी के द्वारा आई मेरी ही शिकायत पर करवाई करने के लिए EPF कमिश्नर और ESIC निदेशक को लिखा। जिसके बाद मेडिकल कालेज नेर चौक में कम्पनियों के खिलाफ जांच शुरू की गई।रजनीश सोनी ने कहा कि मेडिकल कालेज नेर चौक में यदि ऐसी आउटसोर्सिंग कम्पनियाँ मनमानी कर रही है और कर्मचारियों को कम वेतन दे रही है तो सबसे पहले उसकी पूर्ण जिम्मेदारी मुख्य नियुक्ता के तहत मेडिकल कालेज नेर चौक और श्रम अधिकारी मंडी कार्यालय के अधिकारियों की ही बनती है , यदि सम्बंधित अधिकरियों ने जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी को निभाया होता तो आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण नहीं हो सकता था ।रजनीश सोनी ने इनपर आरोप लगाया है कि क्यों उनकी शिकायत के बाद लेबर विभाग और अन्य विभाग के अधिकारी जागे । आखिर क्यों उन्होंने पहले रूटीन जांच नहीं कि मेडिकल कालेज नेर चौक में सभी कम्पनियां अनियमिताओं में लिप्त पाई गई है रजनीश सोनी ने जानकारी दी है कि पैरामेडिकल सेवाएं दे रही आउटसोर्सिंग कम्पनी IL&FS HUMAN RESOURCE PRIVATE LIMITED, स्थित नई दिल्ली ने पिछले एक वर्ष में करीब 30 से 40 लाख का घोटाला किया है और गरीब कर्मचारियों के अधिकारों का वेतन लेकर रफूचक्कर होने की तैयारी थी पँरन्तु अब उनकी शिकायत पर करवाई करते हुए मेडिकल कालेज ने करीब 3.20 लाख प्रति माह के हिसाब से रिकवरी का आंकलन किया है, जो जून 2018 से अब तक करीब 40 लाख के आस पास बनता है, जिसके लिए पिछले तीन महीनों के बिलों को तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है और रिकवरी बारे दिशा निर्देश जारी हो रहे हैं। रजनीश सोनी ने बताया कि EPFO के निरक्षिक दिनांक
1 जुलाई 2019 को केंद्रीय कमेटी के तहत निरक्षण के लिए मेडिकल कालेज में आये थे और वो भी शिकायतकर्ता होने के कारण सारा दिन उनके साथ पूरी इन्क्वारी में मौजूद रहे थे और EPF कमिश्नर ने निरिक्षक को भी उन्हीं कि शिकायत के आधार पर अधिकृत किया गया था और सारा रेकॉर्ड कब्जे में लिया गया है।
रजनीश सोनी ने सवाल किया है कि मेडिकल कालेज नेर चौक में वर्तमान में एक ब्लैक-लिस्ट कम्पनी कार्य कर रही है और हाल ही में उसी ब्लेक लिस्ट कम्पनी को हॉस्पिटल में मरीजों को खाना उपलब्ध करवाने बारे कार्य आंबटित किया गया है रजनीश सोनी ने अतरिक्त मुख्य सचिव स्वस्थ्य को कड़ी चेतावनी दी है और मांग की है कि कर्मचारिओं के साथ यदि ऐसा शोषण होगा तो इंटक सड़कों पर आएगी और प्रशाशन के खिलाफ प्रदर्शन करेगी।उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज में पैरामेडिकल स्टाफ की जो भी रिकवरी कम्पनियों से हो रही है ,वह सारा पैसा इन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का अधिकार है और यह राशि ब्याज सहित इनके बैंक का खाते में डाली जाए और ऐसी कम्पनियों को वो स्वयं ब्लैकलिस्ट करवाकर छोड़ेंगे।उन्होंने नाहन मेडिकल कालेज और चंबा मेडिकल कालेज से भी ऐसी जानकरियां RTI से ली थी और मेडिकल कालेज नाहन और मेडीकल कालेज चंबा में भी इसी प्रकार की धांधलियों और घोटाला उजागर हुआ है क्योंकि यही पैरामेडिकल की आउटसोर्सिंग कम्पनी ILFS Human Resource कार्य कर रही है और तीनों कालेजों की करीब सवा करोड़ से ज्यादा की रिकवरी का आंकलन किया गया है और यह पैसा इन 323 गरीब कर्मचारियों के वेतन से आया पैसा था और यदि उन्होंने इस बारे स्वास्थ्य विभाग को शिकायत नहीं कि होती तो यह करोडो की राशि लेकर कम्पनियाँ भाग जाती और इन कर्मचरियों से शोषण होता रहता।इस सब के लिए श्रम विभाग के अधिकारी जिम्मेदार है क्योंकि यह उनकी जिमेदारी है कि उनके अधिकार क्षेत्र में ऐसे ठेकेदारों के माध्यम से लगे कर्मचारिओ को उनके पद के अनुसार वेतन मिल रहा है या नहीं। इसकी नियमित जांच की जाए।आखिर क्यों एक वर्ष से हो रही धाँधली होने के बाद अब जाग रहे हैं रजनीश सोनी ने इस बारे विजिलेंस को भी शिकायत की है और विजिलेंस के अधिकारी अपने स्तर पर जांच कर रहे है।रजनीश सोनी ने आउटसोर्सिंग कम्पनियों को चेतावनी दी है कि उनके द्वारा नियुक्त कर्मचारियों को श्रम नियम, EPF नियम, बोनस नियम के अंतर्गत वेतन और आदि मूलभूत सुविधाएं नियम अनुसार मिलती रहनी चाहिए अन्यथा वो उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे
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