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कांग्रेस में पांच से ज्यादा गुट, कांग्रेस भवन से लेकर खंड-खंड तक बंटी पार्टी; जनता की चिंता छोड़ अपने नेताओं को निपटाने में व्यस्त कांग्रेस : संदीपनी भारद्वाज

ठियोग में खाची-राठौर की बयानबाजी ने कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई की खोली पोल, सत्ता और टिकट की लड़ाई अभी से सड़कों पर आई : संदीपनी भारद्वाज

शिमला, 19 अगस्त। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस आज एक राजनीतिक दल कम और पांच से अधिक गुटों का समूह ज्यादा बनकर रह गई है। कांग्रेस भवन से लेकर प्रदेश, जिला और खंड स्तर तक पार्टी खंड-खंड में विभाजित दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेताओं का अधिकांश समय जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय एक-दूसरे को नीचा दिखाने, टिकट की दावेदारी कमजोर करने और अपने-अपने राजनीतिक गुट को मजबूत करने में बीत रहा है।

उन्होंने कहा कि ठियोग विधानसभा क्षेत्र को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची और विधायक कुलदीप सिंह राठौर को लेकर सामने आई बयानबाजी ने कांग्रेस के अंदर चल रही राजनीतिक लड़ाई को एक बार फिर सार्वजनिक कर दिया है। पहले यह गुटबाजी बंद कमरों और कांग्रेस भवन तक सीमित रहती थी, लेकिन अब कांग्रेस नेता सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि समाचारों में सामने आया है कि केहर सिंह खाची द्वारा राठौर को लेकर की गई टिप्पणी के बाद लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह खुलकर कुलदीप सिंह राठौर के समर्थन में सामने आए हैं। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस में केवल दो नेताओं के बीच मतभेद नहीं हैं, बल्कि नेताओं के पीछे अलग-अलग राजनीतिक खेमे सक्रिय हैं।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस में पांच से ज्यादा गुट सक्रिय हैं। कोई मुख्यमंत्री का गुट है, कोई मंत्री का, कोई किसी वरिष्ठ नेता का और कोई अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने में लगा है। कांग्रेस मुख्यालय से लेकर खंड स्तर तक पार्टी गुटों में बंटी हुई है। हर गुट दूसरे गुट को कमजोर करने में लगा है।”

2027 के टिकट की लड़ाई अभी से शुरू

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि ठियोग में जो कुछ सामने आया है, उसके पीछे आगामी विधानसभा चुनाव की टिकट की राजनीति भी स्पष्ट दिखाई देती है। कांग्रेस नेताओं ने अभी से यह तय करने की लड़ाई शुरू कर दी है कि 2027 में किसका टिकट कटेगा और किसे टिकट मिलेगा।

उन्होंने कहा कि एक ओर कांग्रेस के नेता अपने ही विधायक की राजनीतिक दावेदारी पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर मंत्री और दूसरे नेता उसके बचाव में उतर रहे हैं। इससे साफ है कि कांग्रेस में सत्ता और संगठन के भीतर वर्चस्व की लड़ाई तेज हो चुकी है।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा, “अभी 2027 दूर है, लेकिन कांग्रेस में टिकटों की लड़ाई शुरू हो चुकी है। जिस पार्टी के नेता आज ही एक-दूसरे की राजनीतिक जमीन काटने में लगे हों, वह हिमाचल के विकास के बारे में कब सोचेगी?”

कांग्रेस भवन खुद गुटबाजी का केंद्र बना

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गुटबाजी केवल ठियोग तक सीमित नहीं है। प्रदेश कांग्रेस संगठन में लंबे समय से अलग-अलग शक्ति केंद्र दिखाई देते रहे हैं। कांग्रेस भवन में एक गुट की बैठक होती है तो दूसरे गुट के नेता उससे दूरी बनाते हैं। जिलों और ब्लॉकों में भी अलग-अलग नेताओं के समर्थक समानांतर राजनीति करते दिखाई देते हैं।

उन्होंने कहा कि आज हालत यह है कि “कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस एक नहीं और खंड स्तर पर कांग्रेस खंड-खंड है।”

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस के नेता भाजपा पर टिप्पणी करने से पहले अपना घर संभालें। जिस संगठन के भीतर अपने ही विधायक, मंत्री और वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के समर्थन और विरोध में उतर रहे हों, वह भाजपा को संगठन का पाठ पढ़ाने की स्थिति में नहीं है।

जनता परेशान, कांग्रेस नेता आपस में लड़ रहे

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई का सबसे बड़ा नुकसान हिमाचल प्रदेश की जनता को हो रहा है। प्रदेश में बेरोजगार युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, कर्मचारी और पेंशनर अपनी देनदारियों के लिए परेशान हैं, किसान-बागवान समस्याओं से जूझ रहे हैं, सड़कें बदहाल हैं और जनता पर लगातार टैक्स एवं महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के बजाय कांग्रेस नेताओं का ध्यान कौन किसके साथ है, किसका राजनीतिक कद बढ़ रहा है, किसका टिकट कटेगा और कौन किस गुट का नेता बनेगा, इसी राजनीति में लगा हुआ है।

उन्होंने कहा, “हिमाचल की जनता ने कांग्रेस को सरकार चलाने का जनादेश दिया था, आपस में राजनीतिक हिसाब-किताब करने का नहीं। कांग्रेस की गुटबाजी का खामियाजा प्रदेश की जनता क्यों भुगते?”

सरकार और संगठन में तालमेल नहीं, हर नेता अपनी दिशा में

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार और संगठन के बीच समन्वय का अभाव बार-बार सामने आता रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी बताती है कि कांग्रेस के भीतर राजनीतिक संवाद की व्यवस्था कमजोर पड़ चुकी है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस में “एक पार्टी, एक दिशा” जैसी कोई स्थिति दिखाई नहीं देती। हर बड़ा नेता अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने में लगा है और उसके समर्थक अपने-अपने खेमे को मजबूत करने में जुटे हैं।

उन्होंने कहा कि ठियोग में सामने आया घटनाक्रम कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति की केवल एक झलक है। आने वाले समय में जैसे-जैसे 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आएगा, कांग्रेस के भीतर टिकट और नेतृत्व की लड़ाई और खुलकर सामने आएगी।

पहले अपना घर संभाले कांग्रेस

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि भाजपा एक अनुशासित और कार्यकर्ता आधारित संगठन है, जहां संगठन सर्वोपरि है। कांग्रेस नेताओं को भाजपा पर टिप्पणी करने से पहले अपनी पार्टी की स्थिति देखनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस में आज पांच से अधिक राजनीतिक खेमे सक्रिय हैं। कांग्रेस भवन से लेकर ब्लॉक तक पार्टी विभाजित है। एक नेता बयान देता है, दूसरा उसी पार्टी का नेता उसके विरोध में खड़ा हो जाता है और तीसरा किसी एक के बचाव में उतर आता है। यह राजनीतिक संगठन नहीं बल्कि गुटों की लड़ाई बन चुकी है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई और सत्ता संघर्ष को प्रदेश की जनता गंभीरता से देख रही है। कांग्रेस जितना समय अपने नेताओं को निपटाने और राजनीतिक गुट मजबूत करने में लगा रही है, यदि उसका आधा समय भी जनता की समस्याओं को हल करने में लगाती तो हिमाचल की स्थिति आज कहीं बेहतर होती।

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