धर्मपुर (मंडी)। साईं इटरनल फाउंडेशन धर्मपुर द्वारा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ औषधीय पौधों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। फाउंडेशन ने औषधीय गुणों से भरपूर मोरिंगा के एक हजार पौधे तैयार किए हैं। इन पौधों को क्षेत्र के लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग मोरिंगा जैसे उपयोगी पौधों को अपने घरों, खेतों और बगीचों में लगा सकें।
साईं इटरनल फाउंडेशन में कार्यरत एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर शुभम शर्मा ने बताया कि फाउंडेशन द्वारा वर्तमान में मोरिंगा के करीब एक हजार पौधे तैयार किए गए हैं। मोरिंगा को औषधीय एवं पोषण की दृष्टि से बेहद उपयोगी पौधा माना जाता है। इसके विभिन्न हिस्सों का पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन का उद्देश्य लोगों को अधिक से अधिक औषधीय एवं उपयोगी पौधों के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने बताया कि मोरिंगा के साथ-साथ फाउंडेशन की ओर से हरड़ और बेहड़ा के पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं। इन पौधों को तैयार करने का उद्देश्य क्षेत्र में औषधीय पौधों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ प्राकृतिक हरियाली को भी बढ़ावा देना है।
शुभम शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में औषधीय पौधों और स्थानीय स्तर पर उपयोगी प्रजातियों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। ऐसे पौधे पर्यावरण को बेहतर बनाने के साथ लोगों को प्रकृति से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फाउंडेशन आने वाले समय में भी विभिन्न प्रजातियों के औषधीय एवं फलदार पौधों को तैयार करने पर जोर देगा।
साईं इटरनल फाउंडेशन की इस पहल से क्षेत्र के लोगों में भी उत्साह है। लोगों का कहना है कि यदि औषधीय पौधे आसानी से उपलब्ध करवाए जाएं तो ग्रामीण क्षेत्रों में इनके संरक्षण और रोपण को काफी बढ़ावा मिल सकता है। फाउंडेशन की ओर से पहले भी क्षेत्र में बड़े स्तर पर पौधारोपण और पौधों के वितरण की पहल की जाती रही है।
फाउंडेशन का प्रयास है कि तैयार किए जा रहे पौधों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए और उन्हें इनके संरक्षण तथा उचित देखभाल के लिए जागरूक किया जाए। इससे धर्मपुर क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ औषधीय पौधों के संरक्षण को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

मोरिंगा के एक हजार औषधीय पौधे तैयार, हरड़-भेड़ा की पौध भी विकसित कर रहा साईं इटरनल फाउंडेशन
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